मां की तपश्चर्या साधना से ही हनुमान जैसे पुत्र

जबलपुर में मराठी में हनुमान कथा
जबलपुर दर्पण। हनुमत आराधना से जीवन के कष्टों का नाश होता है, जीवन के हर में त्वरित निर्णय क्षमता, तात्कालिक निर्णय क्षमता विकसित होती है।
अंजना ने हनुमंत जब गर्भ में थे तब तपश्चर्या साधना की तो जन्मोपरांत हनुमान जी महाराज तेज बल और बुद्धि के परम ज्ञानी हुए। माता-पिता की भक्ति का कृपा प्रसाद से बच्चों को विशिष्ट क्षमता विकसित होती है। गर्भस्थ शिशु मां के आचार विचार और सुसंस्कृत व्यवहार से सीखते हैं, समर्थ रामदास, आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद जी हमारे लिए उदाहरण है।
संस्कारधानी जबलपुर में पितृपक्ष के अवसर पर परम पूज्य श्री गोविन्द देव गिरी जी महाराज के कृपापात्र, लेखक चिंतक विचारक श्री दिलीप महाजन ने श्री हनुमान कथा में श्री सत्संग सभा यादव कालोनी के तत्वावधान में प्रज्ञा मंडपम यादव कालोनी मेहता पेट्रोल पंप के पीछे व्यास पीठ से कहे।
पुणे महाराष्ट्र से पधारे कथा व्यास श्री दिलीप महाजन श्री रघुवीर समर्थ रामदास जी के भक्त और अनेक पुस्तकों के रचयिता, प्रकाशक हैं, जबलपुर में 26 वीं मध्य प्रदेश में पहली कथा है।
श्री हनुमान पोथी, व्यासपीठ पूजन श्री सत्संग सभा के वरिष्ठ समर्थ भक्त सुरेश तोपखाने वाले,डा स्वाति सदानंद गोडबोले, अभय गोरे, विश्वास पाटंणकर, उदय देशमुख, विजय भावे, प्रतिभा विध्येश भापकर, निलिमा सुभाष देशपांडे, प्रेरणा हेमंत पोहरकर, प्राजक्ता प्रवीण विप्रदास, निधि अभय सवडतकर, विवेक मैराल ,डॉ क्षमा सुबोध मांडवीकर, रंजना भास्कर वर्तक, राजेश तोपखाने वाले, रंजीत सिंह ठाकुर, सतीश चौहान, श्रीकांत भुसारी, तरूण सोनोने, संजय आपटे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।



