दिव्यकला मेला में बिखरी दिव्यांगजनों की कलात्मक अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

जबलपुर दर्पण । एमएलबी परिसर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित दिव्यकला मेले के सातवें दिन का आयोजन बेहद रंगारंग और प्रेरणादायक रहा। विभिन्न संस्थाओं और दिव्यांगजनों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। मेले में प्रमुख अतिथियों में निशक्तजन आयुक्त संदीप रजक, निधि गुप्ता, बलदीप सैनी, डॉ. नवीन कोठारी, डॉ. अशोक विद्यार्थी, गोपाल कृष्ण स्थापक (वंदन पुनर्वास), पीयूष जैन, अभय दुबे सहित दिव्यांग परिवार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान मानसिक दिव्यांग स्कूल के मूक-बधिर छात्रों ने “बम बम भोले, मस्ती में डोले” गीत पर अपनी अद्भुत नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को तालियां बजाने और थिरकने पर मजबूर कर दिया। वंदन पुनर्वास एवं अनुसंधान केंद्र के कलाकारों ने शैली धुपे के निर्देशन में “कभी बतलाता नहीं हूँ मां” गीत पर अपनी सजीव प्रस्तुति दी, जिसमें मातृ-स्नेह और भावनाओं का अनोखा प्रदर्शन हुआ। इसके अलावा, जस्टिस तंखा मेमोरियल स्कूल, वंदन पुनर्वास, और चैतन्य पुनर्वास के बच्चों ने भी दर्शकों को बांधे रखा। इन प्रतिभाशाली दिव्यांगजनों के लिए बड़े मंच पर प्रस्तुति देना गर्व और आत्मविश्वास से भर देने वाला अनुभव था। दिव्यकला मेले में विभिन्न शहरों से आए दिव्यांगजन कलाकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प और वस्त्रों के 100 स्टॉल भी लगे हैं, जिनमें बनारसी साड़ी, कोसा, लीलन, कथान जैसी साड़ियों के स्टॉल दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।



