शहीदी दिवस पर अमृत रस कीर्तन दरबार, गतकां और क्विज़ का आयोजन

जबलपुर दर्पण। गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार गोरखपुर में आज शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य अमृत रस कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरुद्वारा बडूसाहब अकाल अकादमी के कीर्तनी जत्थे ने इस मौके पर गुरुवाणी का कीर्तन प्रस्तुत किया, जिससे साध संगत को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति हुई। इसके साथ ही ढाड्डी जत्थे ने जोशीले वारां गायन के माध्यम से युद्ध के जीवंत नजारे प्रस्तुत कर संगत को रसासिक्त किया।
गुरुवाणी के गायन के दौरान सुर, ताल और लय का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसे सुनकर संगत निहाल हो गई। इस पवित्र अवसर पर पंथिक सेवाओं हेतु गुरुद्वारा के प्रधान साहब सरदार राजिंदर सिंह छाबड़ा, महासचिव मनप्रीत सिंह आहूजा और बी.एस. जस्सल को सिरोपा प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनके योगदान के लिए दिया गया, जिससे शहीदी सप्ताह की गरिमा और बढ़ गई।
शहीदी सप्ताह के दौरान विविध आयोजनों की श्रृंखला: चार साहिबजादों की शहादत को समर्पित शहीदी सप्ताह के दौरान गुरुद्वारा गोरखपुर के साथ-साथ अन्य गुरुद्वारों में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुद्वारा ग्वारीघाट, प्रेम नगर, मदन महल, श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन हाथीताल, और रांझी में भी कीर्तन दरबार और गुरु का लंगर आयोजन किया जा रहा है।
साथ ही, नारी शक्ति द्वारा नगर की स्त्री सत्संग सभाओं के तहत सामूहिक गुरु स्तुति एवं साहबजादों की पावन याद में समागम भी निरंतर किए जा रहे हैं। विशेष रूप से 28 और 29 दिसंबर को अधारताल सभा के नेतृत्व में गुरुद्वारा प्रेमनगर में शहीदी दिवस का सामूहिक आयोजन किया जाएगा। इसी दिन नगर कीर्तन भी निकाला जाएगा, जो गुरुद्वारा सदर में समाप्त होगा।
ग्वारीघाट में हुए अन्य कार्यक्रम-शहीदी सप्ताह के दौरान गुरुद्वारा ग्वारीघाट में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने अपनी प्रतिभा का नायाब नमूना पेश किया। यहां मार्शल आर्ट गतकां प्रदर्शन, शुद्ध गुरुवाणी पाठ, पेंटिंग ड्राइंग और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में शामिल बच्चों ने अपनी कला और ज्ञान का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखकर उपस्थित जनसमूह ने उन्हें वाहवाही दी।
गुरुद्वारा ग्वारीघाट के प्रधान गुलजीत सिंह साहनी ने इस आयोजन में सभी के योगदान के लिए आभार प्रकट किया। इसके बाद कड़ाह प्रसाद और गुरु का लंगर दिनभर वितरित किया गया, जिससे सभी श्रद्धालुओं को प्रसन्नचित्त किया गया।
इस आयोजन से यह संदेश गया कि शहीदी दिवस के दौरान सिर्फ शहादत को याद करना ही नहीं, बल्कि गुरु के आशीर्वाद से सबको एकजुट होकर सेवा कार्यों में भाग लेना भी हमारे धर्म का हिस्सा है।



