जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

रानी दुर्गावती की प्रतिमा का एनएसयूआई द्वारा शुद्धिकरण, कुलगुरु की बर्खास्तगी की मांग

जबलपुर दर्पण। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा के खिलाफ उठे विवादों के बीच, एनएसयूआई ने आज विश्वविद्यालय परिसर में स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा का शुद्धिकरण किया। यह शुद्धिकरण विरोध प्रदर्शन कुलगुरु द्वारा महिला अधिकारी के खिलाफ किए गए अमर्यादित व्यवहार और उनकी अवैध नियुक्ति के खिलाफ था। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक और प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ गौतम के नेतृत्व में छात्रों ने इस अभियान के माध्यम से कुलगुरु के पद से इस्तीफे की मांग की।

विरोध प्रदर्शन और शुद्धिकरण अभियान-एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर दूध और जल का अभिषेक किया, जिसे वे विश्वविद्यालय की पवित्रता को पुनः स्थापित करने के प्रतीक के रूप में देख रहे थे। छात्र नेता सचिन रजक ने बताया कि यह शुद्धिकरण अभियान कुलगुरु के खिलाफ छात्र समुदाय की गहरी नाराजगी और उनके कृत्यों की निंदा करने के लिए था।

सचिन रजक ने कहा, “रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के उच्च आदर्शों का प्रतीक है, लेकिन कुलगुरु के आचरण ने इस संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। हम उन्हें उनके पद से बर्खास्त करने की मांग करते हैं।”

कुलगुरु पर आरोप-कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा पर महिला अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कुलगुरु ने अपने अधीनस्थ महिला अधिकारी से अमर्यादित इशारे किए और उनका अपमान किया। इससे विश्वविद्यालय की गरिमा को भारी धक्का लगा है। छात्रों ने इसे केवल एक महिला अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि महिला सम्मान और समाज की नैतिकता पर हमला माना है।

अवैध नियुक्ति पर सवाल– एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि प्रो. वर्मा की नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के उल्लंघन में की गई थी। उनके पास प्राध्यापक के पद के लिए आवश्यक अनुभव नहीं था, फिर भी उन्हें कुलगुरु बना दिया गया। छात्र नेताओं का मानना है कि यह शिक्षा व्यवस्था का मखौल उड़ाने के समान है और इससे विश्वविद्यालय की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

एनएसयूआई की मांगें:

  1. कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा के खिलाफ महिला अधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए।
  2. उनके खिलाफ की गई अवैध नियुक्ति की गहन जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
  3. विश्वविद्यालय में एक योग्य और नैतिक कुलगुरु की नियुक्ति की जाए।

एनएसयूआई ने यह भी कहा कि उनका विरोध प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की पवित्रता और महिला सम्मान की रक्षा करने के लिए एक गंभीर आह्वान है। छात्रों ने यह संकल्प लिया है कि वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक कुलगुरु को उनके पद से बर्खास्त नहीं किया जाता।

प्रदर्शन में शामिल लोग- इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष सचिन रजक, प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ गौतम, संगठन प्रभारी साहिल यादव, मो. अली, एजाज अंसारी, अनिल मिश्रा, अर्पित सोनकर, शुभम यादव, पुष्पेंद्र गौतम, राखी राय, काजल चौधरी, हिमांशु रजक, शोहील, रोहित, राहुल बघेल सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

यह विरोध प्रदर्शन केवल कुलगुरु के खिलाफ नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की गरिमा और महिला सम्मान के प्रति संवेदनशीलता को पुनः स्थापित करने का था। एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक संघर्ष करते रहेंगे, जब तक न्याय की प्राप्ति नहीं हो जाती।

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