मध्य प्रदेशसीधी दर्पण

सार्थक एप में फर्जीवाड़े की आशंका , खड्डी कॉलेज में अतिथि विद्वानों की हाजिरी पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज

सीधी जबलपुर दर्पण । उच्च शिक्षा विभाग द्वारा महाविद्यालयों में पढ़ा रहे नियमित प्राध्यापको सहित अतिथि विद्वानों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए इस वर्ष सार्थक एप से हाजरी को लगाू किया है, अब वेतन ही इसके आधार पर बन रहा है लेकिन इसमें एक बार फिर फर्जीवाड़ा की चर्चाएं तेज है, इसको लेकर शिकायत मप्र कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव रामप्रकाश तिवारी डैडू ने क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा रीवा संभाग से की है और जांच की मांग की है। उन्होंने शिकायत में बताया है कि वह बीते दिनों खड्डी प्रवास पर थे, इस दौरान वह खड्डी कॉलेज के समीप पहुंचे तो वहां के स्टॉफ अपनी समस्याओं को लेकर कुछ बाते कर रहे थे, जब उन्होंने जानकारी ली तो कई बाते सामने आईं। चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह भी मिली कि यहां प्राचार्य की जगह एक अतिथि विद्वान डॉ.अजय सिंह गहरवार को विभाग की सबसे महत्वपूर्ण सार्थक एप का आईडी-पासवर्ड दे दिया गया है। बताया गया कि अतिथि विद्वान डॉ.स्वेता तिवारी व डॉ.भावना सिंह के सार्थक एप में आए दिन गड़बड़ी रहती है, हाजरी देरी से लगती है, कभी सार्थक मे 200मीटर से तो कभी 400 मीटर लोकेशन दूरी पर महाविद्यालय प्राचार्य कक्ष में होने के बाद भी बताता है। उनको आशंका है कि उनके सार्थक के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है इसकी जांच कराई जाए व तत्काल डॉ.अजय सिंह से आईडी पासवर्ड सहित लेकर नियमित कर्मचारी को दिया जाए। चर्चा में यह भी जानकारी मिली कि बताया गया कि अतिथि विद्वान अभिनंदन पांडेय व प्रिंश मिश्रा व डॉ.श्रीकांत द्विवेदी द्वारा सार्थक एप में गलत तरीके से हाजरी लगाई जा रही है। चर्चा मे पता चला कि अभिनंदन पांडेय की माता जी का देहांत हाल ही में हुआ, वह करीब दो सप्ताह कॉलेज नहीं आए फिर भी उनके द्वारा आकर बीच-बीच में रजिस्टर में हस्ताक्षर किए गए और सार्थक में हाजरी भी लगी हुई है, यह बड़ा सवाल है कि जब वह खड्डी में नहीं थे तो उनकी खड्डी की लोकेशन के साथ हाजरी कैसे लगी, इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि सार्थक में छेड़छाड़ कर ऐसा किया गया। इसी प्रकार डॉ.अजय सिंह द्वारा भी सीधी में रहते हुए हाजरी लगाने पर लोकेशन खड्डी की आती है। अन्य अतिथि विद्वान भी रीवा में रहते हुए हाजरी लगाते हैं तो लोकशन रीवा की जगह खड्डी बताती है। अप्रैल, मई और जून माह के सार्थक की जांच में खुलासा हो सकता है। बताया गया कि इस संबंध में शिकायत प्रभारी प्राचार्य डॉ.रामसुरेश भारती से की गई लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की गई, उल्टा शिकायत करने वालो को ही परेशान किया जा रहा है, वह खुद कभी कॉलेज नहीं आते हैं।

फोटो के बाद अब वीडियो का रास्ता
बता दें कि जब सार्थक एप को लागू किया गया तो कई लोग मुख्यालय में न होते हुए भी दूसरे स्टॉफ से मोबाईल से फोटो दिखाकर हाजरी लगवा लेते थे, जब फर्जीवाड़ा सामने आया तो विभाग ने आई ब्लिंक करते हुए लाइव होकर हाजरी लगाने के लिए निर्देशित किया लेकिन पूर्व प्रदेश सचिव ने बताया कि उनको उनके करीबी अतिथि विद्वान ने यह बताया कि कुछ लोग अपने सहयोगी स्टॉफ को मोबाईल में आई ब्लिंक करते हुए वीडियों बनवाकर दे देते हैं और दूसरे मोबाईल में सार्थक लागिन कर हाजरी लगा दी जाती है। इस बात से इंकार इसलिए नहीं किया जा सकता है क्योंकि पहले भी इस प्रकार के फर्जीवाड़ा सामने आए है। कई लोग लोकेशन से छेड़छाड़ भी करते हैं। उन्होंने कहा कि जो फर्जीवाड़ा करते हैं उनके द्वारा आरोप लगाया जाता है कि अन्य अतिथि विद्वान करते हैं लेकिन वहां के अतिथि विद्वानों का कहना है कि सार्थक एप की जांच हो जाए तो खुद सामने आ जाएगा कि कौन मुख्यालय में रहता है और कौन फर्जीवाड़ा कर रहा है और शासन प्रशासन को गुमराह कर रहा है।बता दें कि खड्डी कॉलेज में लगातार विवाद चल रहा है, इसका बड़ा कारण वरिष्ठ अधिाकारियों की उदासीनता भी है, अभी तक यहां नियमित प्राचार्य की पदस्थापना नहीं हुई और न ही शिकायतों में जांच हुई, जिससे मनमानी करने वालो के हौसले बुलंद हैं। न ही अतिथि विद्वान के वीडियो वॉयरल मामले में कोई कार्यवाही की गई औ न ही प्रभारी प्राचार्य के महाविद्यालय न आने और स्टॉफ को परेशान करने के मामले में कोई कार्यवाही हुई। अब तक अतिथि विद्वानों का वेतन भुगतान भी नहीं किया गया। उन पर सीएम हेल्पलाइन वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

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