कटनी जिला अस्पताल – बदहाली की हकीकत

ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । कटनी जिला अस्पताल की हालत किसी भयावह सच्चाई से कम नहीं। इन दिनों मौसम बदलने से बुखार, सर्दी-जुकाम, मलेरिया और डेंगू जैसी मौसमी बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। गाँव-गाँव से हजारों मरीज रोज़ अस्पताल पहुँच रहे हैं। बढ़ती भीड़ से अस्पताल का हाल और ज्यादा बदतर हो चुका है।
वार्डों में न पर्याप्त बेड हैं, न स्ट्रेचर। मरीजों को जमीन पर चादर बिछाकर इलाज कराना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह मरीज और उनके परिजन बेसहारा पड़े रहते हैं।
जिस जगह को गरीब और आम जनता के लिए सहारा होना चाहिए, वही आज अव्यवस्था और लापरवाही का गढ़ बन गया है। डॉक्टरों का रवैया संवेदनहीन है, नर्स और स्टाफ की कमी साफ दिख रही है और प्रबंधन हालात पर चुप्पी साधे बैठा है।
बढ़ती बीमारियों के इस दौर में जब सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को सबसे ज्यादा सक्रिय होना चाहिए था, तब जिला अस्पताल दम तोड़ती व्यवस्था का आईना बन गया है।
उधर, सरकार अब अस्पतालों में PPP मॉडल थोपने की तैयारी में है। जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि इस मॉडल से इलाज और महँगा हो जाएगा, जिससे गरीब मरीज और बड़ी मुश्किल में फँस जाएंगे।
सबसे बड़ा सवाल यही है –
- जब सरकारी अस्पताल ही चरमराने लगें तो गरीब कहाँ जाए?
- मौसमी बीमारियों से जूझते हजारों मरीजों का सहारा कौन बनेगा?
कटनी जिला अस्पताल की तस्वीरें और हालात इस बात की गवाही देते हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी लापरवाही, संवेदनहीनता और कुप्रबंधन हावी है। अगर अब भी सरकार और प्रशासन ने कदम नहीं उठाए, तो हालात किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं होंगे।



