27 प्रतिशत आरक्षण पर सहमति अलोकतांत्रिकसंवैधानिक मानकों पर तय होना चाहिए
जबलपुर दर्पण । म.प्र. प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के सहसंयोजक असीम त्रिवेदी ने राज्य सरकार और प्रमुख विपक्षी के द्वारा 27 प्रतिशत ओ बी सी पर सहमति की घोर भर्त्सना करते हुए इसे अलोकतांत्रिक निरूपित किया है और कहा कि यह तय संवैधानिक मानक पर होना चाहिए न कि वोटों के पैमाने पर । महासभा ने कहा कि यह जो एक तथाकथित ‘सहमति’ का प्रहसन चल रहा है , यह लोकतंत्र के मर्म पर एक चोट है। यह फैसला संवैधानिक मानकों पर होना चाहिए, वोटों के अंकगणित पर नहीं ।सत्ता और प्रमुख विपक्ष—दोनों ही इस सामान्य वर्ग के साथ एक तरह का ‘समझौता’ कर रहे हैं, जो राजनीति का एक अत्यंत निंदनीय पक्ष है , जबकि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह समाज के सभी वर्गों के हितों की रक्षा करें। जब सर्वोच्च न्यायालय में संवैधानिक विषय लंबित है, तो संवैधानिक निराकरण की प्रतीक्षा करना चाहिए था तब एक पूर्वाग्रह से ग्रसित सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि यह समाज के एक बड़े वर्ग के साथ अन्याय है। और यह अन्याय चुपचाप देखते रहना, इसका विरोध न करना, हमारी लोकतांत्रिक चेतना पर एक कलंक है।



