लाड़ली बहना करे पुकार,अवैध पैकारी, कब करेगी बंद सरकार

ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में चार ,पांच दुकान लाइसेंसी है जिसके ठेकेदार एकलौते आकाश जायसवाल है,जिससे अपनी मन मर्जी मुताविक व्यापार करते हे, इनकी किसी भी दुकान पर विक्रय मूल्य की सूची नही मिलेगी।जिससे वो अपनी मनमरजी कीमत पर व्यापार करते है।और इनके द्वारा शराब दुकानों के बावजूद अवैध शराब का कारोबार तेज़ी से फल-फूल रहा है। आरोप है कि शराब ठेकेदारों का साम्राज्य गांवों तक फैल चुका है, जहां वे अपने गुर्गों के माध्यम से बेखौफ शराब बेच रहे हैं। इस अवैध कारोबार से युवा और बच्चे नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जबकि स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की खामोशी उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
गाँव-गाँव में अवैध दुकानें
ढीमरखेड़ा तहसील के पान उमरिया, ढीमरखेड़ा और खमतरा,सिलौड़ी क्षेत्र में लाइसेंसी ठेके हैं, लेकिन शराब ठेकेदार इन दुकानों की आड़ में पूरे इलाके में अवैध कारोबार चला रहे हैं। ठेकेदार आकाश जायसवाल पर आरोप है कि वे ढीमरखेड़ा तहशील क्षेत्र के हर गावों मे अवैध शराब का जाल फैला चुके हैं।
जहां देर रात तक शराब पीने-पिलाने का काम चलता है। इन ठिकानों पर अक्सर शोरगुल और गाली-गलौज होती है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
युवा और बच्चे बन रहे शिकार
इस अवैध कारोबार का सबसे बुरा असर युवा वर्ग पर पड़ रहा है। आसानी से उपलब्ध होने वाली शराब की वजह से युवा नशे की दलदल में फंसकर अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। ठेकेदार, पैसों के लालच में, मजदूरों और यहां तक कि बच्चों को भी शराब उपलब्ध करा रहे हैं।
प्रशासन की मिलीभगत के आरोप
स्थानीय लोगों और रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले में पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका पर संदेह है। आरोप है कि विभाग के अधिकारी शराब ठेकेदारों से ‘गांधीजी के चमकते नोट’ लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। जब कभी कार्रवाई का दिखावा करना होता है, तो सूचना पहले ही लीक हो जाती है, जिससे अवैध कारोबारी सतर्क हो जाते हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि ‘देशभक्ति और जनसेवा’ का नारा लगाने वाली पुलिस और आबकारी विभाग इस अवैध धंधे पर लगाम लगाने में नाकाम क्यों है? क्या आबकारी विभाग में कोई जासूस है, या फिर ठेकेदारों ने आबकारी पर भी तीसरी आंख लगा रखी है? इस गंभीर स्थिति के बावजूद, प्रशासन की चुप्पी से ठेकेदारों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, जिसका खामियाजा पूरा समाज भुगत रहा है।



