साहित्य दर्पण
सावन में

रिमझिम खूब बरसता बादल
सावन में।
मोर मस्त हो कर नाचता
सावन में ।
बागो में कोयल गीत सुनाती
सावन में।
चारो तरफ हरियाली छा जाती
सावन में।
सखियां झूला खूब झूलती
सावन में।
गजरी सब मिल जुल कर गाती
सावन में।
पच ई का त्यौहार आता
सावन में।
नाग पंचमी सब मनाते
सावन में।
सजनी साजन को घर बुलाती
सावन में।
मेढक टरॅ टरॅ के गीत सुनाते
सावन में।
बद्री प्रसाद वर्मा अनजान
गल्ला मंडी गोला बाजार 273408
गोरखपुर उ प्र भारत
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