जबलपुर दर्पण

सिहोरा के लिए बड़ा कठिन संकल्प

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । सिहोरा जिले की लंबित मांगों को लेकर जारी आन्दोलन ने नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक और सिहोरा के वरिष्ठ निवासी प्रमोद साहू ने ऐलान किया कि वे 9 दिसंबर 2025 से अन्न एवं जल का त्याग कर देंगे। यह निर्णय उन्होंने जिले में लगातार असफल होते अनुरोधों और एक युवा द्वारा आत्मदाह की बात कहे जाने से उत्पन्न गहरे वेदना के बाद लिया है। प्रमोद साहू ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वे 6 दिसंबर 2025 (शौर्य दिवस) को दोपहर 3 बजे अपने घर पर आमरण सत्याग्रह व सद्बुद्धि यज्ञ प्रारम्भ करेंगे, इस दौरान केवल जल ग्रहण करेंगे। तीन दिनों के यज्ञ के बाद—यानी 9 दिसंबर दोपहर 3 बजे से—वे जल का भी त्याग कर देंगे। उन्होंने सिहोरा वासियों से आह्वान किया है कि वे 9 दिसंबर को दोपहर 11:00 से 12:00 के बीच सिहोरा बस स्टैंड पर एकत्र होकर यज्ञ में पुष्प अर्पित करें। प्रमोद साहू ने स्पष्ट किया कि उनकी पहचान राष्ट्रीय स्वयंसेवक की है, पर यह निर्णय उन्होंने एक नागरिक के नाते लिया है। उन्होंने कहा, “सिहोरा भारत का नाभि केंद्र है — जो कुछ भी देश में घटता है, उसका संबंध सिहोरा से जुड़ा हुआ है।” पत्रकार वार्ता में उन्होंने आंदोलन की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि सिहोरा के लिए लड़ी गई लड़ाई में खून-खराबा, भूमि समाधि और कई सत्याग्रह हो चुके हैं, पर लंबित मांगों के लंबे समय तक पूरा न होने से अब परस्थितियाँ गंभीर हो गई हैं। उन्होंने स्थानीय प्रतिनिधियों और राज्य के नेताओं से सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों के वादों के बावजूद समस्याएँ जस की तस बनी हैं। प्रमोद साहू ने पत्रकारों को बताया कि एक युवा हाल ही में उनके पास आया और भावुक होकर कहा कि कब तक यही आंदोलन चलता रहेगा — अब वह किसी बड़े कार्यक्रम में आत्मदाह करने का विचार कर रहा है। उस युवा की यह पीड़ा और बात सुनकर उनका हृदय धक से रह गया और उन्होंने उसे ऐसा न करने हेतु समझाने के साथ स्वयं यह कठिन संकल्प ले लिया। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष की पीड़ा का निवारण व सिहोरा के हित में नागरिक कर्तव्य निभाने की प्रेरणा से उठाया गया है। साथ ही प्रमोद साहू ने डॉ. और मीडिया को शाम के समय मिलने का अनुरोध भी रखा ताकि आवश्यक तैयारियाँ और जानकारी साझा की जा सकें। इस आंदोलन समिति के आयोजकों ने कहा है कि सिहोरा की मांगों के स्थायी समाधान तक यह संघर्ष जारी रहेगा और वे शान्तिपूर्ण तरीके से अधिकारों की माँग करते रहेंगे।

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