विवाह प्रेम का प्रतीक है: डॉ. श्याम सुंदर

सीधी जबलपुर दर्पण। श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन, कथा व्यास डॉ. श्याम सुंदर पाराशर ने श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का वर्णन किया। कथा के दौरान सुंदर झांकियां प्रस्तुत की गईं। भक्तों ने रुक्मणी विवाह का आनंद लिए। आयोजन एवं मुख्य यजमान श्रीमती प्रमिला यज्ञ नारायण सोनी द्वारा पाव पाखरी की रस्म अदा की गई। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह की अमृत वर्षा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। सर्वप्रथम श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ कथा व्यास के भजन से हुआ। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि नंदालय में गोपियों का तांता लगा रहता है। हर गोपी भगवान से प्रार्थना करती है कि किसी न किसी बहाने कन्हैया मेरे घर पधारें। भगवान की महारास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए। मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर जी भगवान को लेने आए। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे समस्त ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो गई। कहने लगी हे कन्हैया जब आपको हमें छोडक़र ही जाना था तो हम से प्रेम क्यों किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि रुक्मणी ने भगवान कृष्ण को पत्र लिखकर सहायता मांगी थी। इसके बाद कृष्ण ने उनका हरण कर विवाह किया। व्यास जी ने कहा कि यह विवाह प्रेम का प्रतीक है। साथ ही यह भक्ति और सत्य की विजय का संदेश देता है। श्री कृष्ण एवं रुक्मणी विवाह उत्सव पर महिलाओं ने नृत्य किया, समस्त श्रद्धालु ने बारात व विवाह का आंनद लिया। रुक्मणी की विवाह को लेकर महिलाओं ने साड़ी व श्रृंगार सामान चढ़ाया। लोग काफी संख्या में एकत्रित होकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। इस मौके पर अंबरीश महाराज प्रयागराज, विनय सोनी, मोहन सोनी, श्रीमती गीता सोनी, अनसूईया सोनी चुरहट, राकेश सेठ प्रयागराज, डॉ. अनूप मिश्रा, श्रीमती रंजना शुक्ला, श्रीमती पूनम सोनी, लालचंद गुप्ता, मानिंद धर द्विवेदी, केदार सोनी, महिपाल सेठ वाराणसी, राजीव सेठ, शिव प्रसाद सोनी बिठौली, रामसुंदर सोनी, मनोज तिवारी, जितेंद्र तिवारी सहित सैकड़ों श्रोता मौजूद थे।



