देवउठनी एकादशी पर निंद्रा से जागे भगवान श्रीहरि

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिले में मंदिरों, देव दिवाले में देवउठनी एकादशी पर निंद्रा से जागे भगवान श्रीहरि, गन्ने के मण्डप पर घर घर हुई तुलसी -शालिग्राम का विवाह आयोजन।
एकादशी देवउठनी को विशेष पूजा का बड़ा महत्व। धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना गया है, विशेष रूप से देवउठनी एकादशी का दिन अत्यंत शुभ और पुण्यदायनी माना जाता है। हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीनों की योगनिद्रा से जागते हैं तथा सृष्टि संचालन का कार्य पुनः आरंभ करते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन के साथ मांगलिक कार्यों का शुभ आरंभ हो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को जगाने के साथ व्रत रखने का विधान है। इस वर्ष देवउठनी एकादशी पर काफी शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन विधिवत पूजा करने पर आपकी पूजा पूर्ण होगी और भगवान विष्णु की कृपा से सुख-समृद्धि, धन-ंसंपदा की प्राप्ति होती है।
देवउठनी एकादशी के पावन पर्व पर भव्य विशेष पूजा एवं महाआरती का आयोजन किया गया ।
देवउठनी एकादशी ग्यारस के दिन गन्ने का मण्डप तुलसी – शालिग्राम का विवाह विशेष पूजा करके भगवान विष्णु श्रीहरि की आरती की जाती है और उन्हें निद्रा से जगाया जाता है।
विशेष रूप से अर्पित की जाती हैं विभिन्न पूजा साम्रगी – गन्ने, सिंघाड़े, सीताफल, आंवला, चना भाजी, बेर, बताशे, लाई, मिष्ठान सहित सिंगार चुन्नी धूप पुष्पमाला श्रीफल ईत्यादि।



