जबलपुर दर्पण

महर्षि सुदर्शन जयंती के अवसर पर समरसता सेवा संगठन ने किया विचार गोष्ठी एवं पौधारोपण

जबलपुर दर्पण । संतो, ऋषियों, महापुरुषों ने किसी समाज विशेष के लिए अवतार नहीं लिया, ऐसे संत अपनी जातियों को पल्ल्वीत पुषपित करने इस धरती पर नहीं आये थे उन्होंने सर्व समाज के कल्याण के लिया अवतार लिया था इसीलिए उन्हें अपनी अपनी जातियों में बांध कर मत रखिये यह बात महर्षि सुदर्शन जयंती के अवसर पर समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये मुख्य वक्ता अनिमेष अटल ने कही।समरसता सेवा संगठन ने महर्षि सुदर्शन जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी पं अशोक मनोध्या, मुख्य वक्ता आध्यात्मिक चिंतक एवं राष्ट्रवादी विचारक अनिमेष अटल, विशिष्ट अतिथि माध्यमिक शिक्षा मंडल उपाध्यक्ष श्रीनिवास राव, समरसता सेवा संगठन अध्यक्ष संदीप जैन, सचिव उज्जवल पचौरी की उपस्थिति में विचार गोष्ठी का आयोजन अग्रवाल धर्मशाला गौरीघाट में किया गया। विचार गोष्ठी के उपरांत समस्त अतिथियों एवं आगँतुक जनों ने नर्मदा उद्यान में पौधा रोपण किया।मुख्य अतिथि पं अशोक मनोध्या ने विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये कहा समरसता सेवा संगठन अपने कार्यों के माध्यम से उस कार्य को कर रहा है जिसकी आज देश को आवश्यकता है।श्री मनोध्यया ने कहा आज महर्षि सुदर्शन की जन्म जयंती हैँ और भारत भूमि संतो, मुनियो की भूमि हैँ जिनकी तप के प्रभाव से भगवान ने धरती पर अवतार लिया ऐसे संतो का हम न केवल स्मरण करें बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलने का भी प्रयास करे।हमने सनातन में जन्म लिया हैँ, सनातन का ने आदि है, न मध्य है, न अंत है और इसी सनातन समाज ने हमें जोड़ने का मार्ग दिखाया और हमें भी यही करना है कि अपने अपने समाज के पिछड़े लोगो को आगे लाने का कार्य करते हुये सभी समाज मिलकर समरस होकर सनातन में समाहित हो जाये इससे देश में समरसता आएगी.सनातन काल से ही वसुधैव कुटुंबकम कि भावना हमारे देश में रही है और आज आवश्यकता है हम जाति समूहों में विभाजित न हो, हम हिंदु है इसका गर्व करें और इसी गर्व के साथ जाति भाषा क्षेत्र का भेद मिटाकर आगे बढे और समरस समाज की स्थापना करें।विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये मुख्य वक्ता अनिमेष अटल ने ने कहा हम पुण्य भूमि भारत में पैदा हुये है और गर्व करिये कि हमने उस देश में जन्म लिया है जहाँ महर्षि सुदर्शन का प्रकाट्य हुआ था। महापुरुष, संत, ऋषि उसे कहते है जो अपने लिए नहीं बल्कि अपनों के लिए जीवन जीते है। महाभारत कालीन महर्षि सुदर्शन भी ऐसे ही संत थे जिन्होंने समाज को अपने विचारों से समाज को दिशा दी, ऐसे संत जो भगवान श्रीकृष्ण के ऊँगली में विराजित हमारे ग्रंथो, संतो को कुचक्र चलाकर हमसे दूर करने का प्रयास किया गया।अनिमेष अटल ने कहा संतो, ऋषियों, महापुरुषों ने किसी समाज विशेष के लिए अवतार नहीं लिया, ऐसे संत अपनी जातियों को पल्ल्वीत पुषपित करने इस धरती पर नहीं आये थे इसीलिए उन्हें अपनी अपनी जातियों में बांध कर मत रखिये साथ ही कभी किसी संत या महापुरुष ने अपने वाणी और विचारों से समाज को तोड़ने नहीं कहा, हमें भी इस जाति बिरादरी के बंधन से मुक्त होने की आवश्कता हैँ और समरसता सेवा संगठन ने समाजो को जोड़कर एक करने का जो प्रयास प्रारम्भ किया हैँ यह अभिनंदनीय हैँ।विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये विशिष्ट अतिथि श्री श्रीनिवास राव ने कहा राष्ट्रीय स्वयं सेवक के 100 वें वर्ष में पाँच बिन्दुओ पर कर रहा है जिसमे स्व का बोध, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्त्यव्य, पर्यावरण और समरसता ऐसे पाँच बिंदु है जिसके लिए समाज के बीच जाकर संघ कार्य करेगा और समरसता के विषय पर समरसता सेवा संगठन विगत 3 वर्षों से कार्य कर रहा है।श्री राव ने कहा हिंदु धर्म के नाम पर एक नहीं हो पाते है किन्तु हमें जाति बिरादरी, व्यापार के बंटवारे से उत्पन्न दूरियों को मिटाते हुये जीवन यापन करना होगा वर्ना हमें पुनः परतंत्र होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।उन्होंने कहा जातियाँ कर्म से होती थी पर कालांतर में जन्म से जातियाँ होने लगी और उसका परिणाम हुआ कि हम आज बंट रहे है और मानव कि मानव से दूरियां बढ़ रही है इसका फायदा हमारे दुश्मनो ने पहले भी उठाया और यदि हम नहीं चेते तो आने वाले समय में भी देश और समाज के दुश्मन इसका फायदा उठाएंगे, इसीलिए आज के समय में एक होकर समरसता के भाव से समाज को जोड़ने की जरुरत है।कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं स्वागत उद्बोधन संगठन के सचिव उज्जवल पचौरी ने दिया।कार्यक्रम का संचालन मनोज सेठ एवं आभार संगठन अध्यक्ष श्री संदीप जैन ने व्यक्त किया।इस अवसर पर लोकराम कोरी, जगदीश चोहटेल, अशोक कटारे, श्याम नारायण बिरहा, मुकेश बिरहा, अजय अरखेल, राजेश नेमा, परसादी लाल बिरहा, अनिल तिवारी, पार्षद अविनाश चमकेल, जागेश समुंद्रे, अभिनव यादव, शरीन बाबा, संतोष झारिया, दीपक नाहर, सूरज समुंद्रे, अशोक कहारे, संजय हरिराम बिरहा, अजय अधिकार, राकेश समुंद्रे, श्याम सोनी, टिकेंद्र यादव, पप्पू गिरहा उपस्थित थे।

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