सीधी दर्पण

कोडार बांध की नहर टूटने से सैकड़ो एकड़ खेत सिंचाई से वंचित

सीधी जबलपुर दर्पण । जिले के आदिवासी बाहुल्य कुसमी ब्लाक के कोडार बांध की नहर टूटने से सैकड़ों एकड़ खेत सिंचाई सुविधा से वंचित हो चुके हैं। करीब 6 वर्ष से टूटी नहर को बनाने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। कुसमी क्षेत्र में कई तरह के काम बांध एवं नहरों के लिये भले ही सिंचाई विभाग एवं अन्य विभागों के द्वारा कर दिए जाएं, लेकिन प्रमुख समस्या पर कोई पहल किसी विभाग के द्वारा नहीं की जाती है। जिससे किसानों की समस्या अनवरत बनी रहती है। कुछ इसी तरह का हाल कुसमी जनपद पंचायत के कोडार बांध के नहर का देखा गया है, जहां बांध की नहर तीन जगह से टूट चुकी है और बताया जा रहा है कि करीब 6 वर्ष हो चुके हैं और नहर का मरम्मतीकरण सिंचाई विभाग के द्वारा नहीं कराया गया है। नहर टूट जाने से बांध का पानी व्यर्थ में पानी किसानों के कुछ खेतों को खराब करते हुये बहता हुआ नाले मे बह जाता है और कुछ किसानों के खेतों तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा है, जिससे सैकड़ो किसान परेशान है और किसानों ने चिंता जाहिर की है एवं आने वाले गेहूं की बुवाई वो कैसे कर पायेगे। इस समस्या को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को किसानों ने आवेदन देकर अवगत भी कराया लेकिन उनका निदान नहीं हो पाया है और समस्या यथावत 6 वर्षों से बनी हुई है। सिंचाई की समस्या के संंबंध में कोडार क्षेत्र के किसानों ने कहा कि नहर टूटने को लेकर वह करीब 6 वर्ष से स्थानीय जन प्रतिनिधियों से फरियाद कर रहे हैं। यहां के किसान आदिवासी वर्ग के हैं इस वजह से सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। जिसका खामियाजा किसानों को सालों से भुगतना पड़ रहा है। खरीफ सीजन में तो कुछ बारिश का सहारा मिल जाता है लेकिन रबी सीजन की खेती सिंचाई के अभाव में सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। ऐसे में टूटी हुई नहर को जल्द से जल्द सुधार कराया जाए जिससे किसानों को खेती की उपज मिल सके।
क्या कहते हैं किसान कोडार बांध की नहर करीब 6 वर्षों से टूट कर पड़ी हुई है। हम लोग किसी तरह से धान की बुवाई तो कर पाते हैं, लेकिन गेहूं की बुवाई हम लोगों की बिल्कुल ही नहीं हो पाती है।
रामराज सिंह, कृषक कोडार ।
नहर 6 वर्षों से टूटी हुई है। हम लोग कई बार शिकायत भी किये लेकिन नहर आज तक नहीं बनी और हम लोग इस समस्या से 6 वर्षों से परेशान हैं। खेती बिल्कुल नहीं कर पाते।
प्रदीप पनिका, कृषक कोडार।
धान के सीजन पर हमारे खेतो में पानी भर जाता है और पूरी धान जिलक जाती है एवं गेहूं की बुवाई भी हम लोग पानी के कारण ही नहीं कर पाते हैं।
दिनेश पनाडिय़ा, कृषक कोडार।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page

situs nagatop

nagatop slot

kingbet188

slot gacor

SUKAWIN88