सिहोरा जिला आंदोलन: भाजपा की साख पर सवाल, वादों की याद दिला रहे सिहोरा वासी

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश के केन्द्र बिंदु और सुन्दर सिहोरा रोड रेल्वे स्टेशन के साथ साथ विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से लगीं सीमा का मुख्यालय सिहोरा विगत अपनी मूल मांग को लेकर नियंत्रर संघर्षरत रहा हैं। पुनः जिला आंदोलन एक बार फिर राजनीतिक हलकों में फिर हलचल मचा रहा है। आगामी 9 दिसंबर से शुरू होने वाले सत्याग्रह को लेकर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी स्पष्ट रुप से दिख रही है। जहां नगर सिहोरा वासियों का कहना है कि “जिला बनाने का वादा भाजपा ने चुनाव से पहले किया था। इसलिए इसे पूरा करना भी भाजपा की ही जवाब दही के साथ जिम्मेदारी बनती हैं।
स्थानीय लोगों की मांग और नाराजगी – स्थानीय लोगों का आरोप है कि भाजपा नेताओं—स्मृति ईरानी, प्रहलाद पटेल, संतोष बरकड़े और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान—ने चुनावी मंचों से सिहोरा जिला बनाने का आश्वासन दिया था। अब, जब जनता अपने अधिकार की मांग कर रही है, तो नेता एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नज़र आ रहे हैं।
2003 में राज पत्र प्रकाशित हेतु और लम्बे इंतजार के बाद भी आम जनता अधिकार के लिए परेशान हो रहीं हैं।
मीडिया को जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने कहा है कि वादा सरकार ने किया था, इसलिए अब पूरा न होना सीधे-सीधे भाजपा की साख पर चोट होती है। अब जनता का यह भी कहना है कि “जब केंद्र से लेकर राज्य तक भाजपा की सरकार है, फिर भी सिहोरा की अनदेखी क्यों?”
वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी लोगों ने नाराजगी जताई है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि वे सिहोरा जिला की मांग को गंभीरता से नहीं ले रहे। परिणामस्वरूप क्षेत्र में भाजपा के प्रति असंतोष बढ़ता दिख रहा है।वही सिहोरा क्षेत्र के समस्त राजनैतिक,सामाजिक,व्यवसायिक संगठनों द्वारा लगातार समर्थन की घोषणाएं भी आंदोलन को जनांदोलन के रंग में सराबोर कर रही है।
सत्याग्रह के आयोजकों ने कहा है कि यह आंदोलन किसी दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि वादे निभाने की मांग है। उनका कहना है कि यदि भाजपा ने भरोसा दिया था, तो उसे निभाने से पीछे भी नहीं हटना चाहिए।
जैसे-जैसे 3 दिसंबर से क्रमिक भूख हड़ताल और 9 दिसंबर आमरण सत्याग्रह की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे वैसे सिहोरा जिला के लिए माहौल गरमाता जा रहा है और सवाल एक ही उठ रहा है— जब जिला सिहोरा का वादा
“भाजपा ने वादा किया है, तो भाजपा ही पूरा करे।”
आंदोलन का प्रभाव कितना व्यापक होगा और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आएगी, अब यह आने वाले दिनों में तय करेगा कि सिहोरा जिला बनने की राह कितनी लंबी या छोटी होगी। ये तो आने वाला व्यक्त ही बताएगा।



