किसानों का पैर पखारना मेरा सौभाग्य : नरेश मरावी

जबलपुर दर्पण । प्रदेश की “किसान-विरोधी नीतियों” के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी सिवनी ने आज व्यापक आंदोलन किया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नरेश मरावी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन की शुरुआत कचहरी चौक पर एक अनोखे संदेश के साथ हुई, जहाँ मरावी ने स्वयं किसानों के पैर पखारकर आंदोलन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा — “अन्नदाता का पैर पखारना मेरा सौभाग्य है। किसान हमारे पोषक हैं, उनका सम्मान हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
सरकार पर तगड़ा हमला, समर्थन मूल्य में धोखाधड़ी का आरोप
आंदोलन को संबोधित करते हुए नरेश मरावी ने प्रदेश की भाजपा सरकार को किसान-विरोधी बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन आज किसान अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है।
उन्होंने कहा—
- मक्के का समर्थन मूल्य 2400 रु./क्विंटल घोषित है, लेकिन मंडी में बोली 1200 से 1600 रु. तक ही लग रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
- मक्का उत्पादन की लागत ही लगभग 1500 रु. प्रति क्विंटल बैठती है, ऐसे में किसान घाटे में जा रहा है।
- धान खरीदी “कागजी” हो गई है। प्रति एकड़ पैदावार की तुलना में आधी ही खरीदी हो रही है, ऊपर से गुणवत्ता के नाम पर बड़ी संख्या में किसानों की धान रिजेक्ट कर दी जा रही है।
- उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में प्रदेश का अन्नदाता गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
बिजली, पानी, खाद-बीज सहित कई मांगें
मरावी ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव के दौरान किसानों से अनेक वादे किए थे—
- फसलों का पूरा समर्थन मूल्य
- पर्याप्त खाद-बीज
- सिंचाई की व्यवस्था
- और कृषि कार्य के लिए पर्याप्त बिजली
लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार ने इनमें से किसी वादे को पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि “प्रदेश का किसान आज बिजली कटौती, पानी की किल्लत, खाद-बीज की कमी और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अभाव से त्रस्त है।”
“किसान है तो देश है” — कांग्रेस ने दी चेतावनी
जिला कांग्रेस कमेटी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन और व्यापक स्वरूप लेगा।
मरावी ने कहा—
“किसान हमारे प्रदेश और देश की रीढ़ है। उनकी पीड़ा अनसुनी नहीं होने दी जाएगी। जब तक किसानों को न्याय नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



