दिव्यांग बहरे बच्चों के उपचार में भ्रष्टाचार

जबलपुर दर्पण | मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के तहत जन्मजात दिव्यांग बहरे बच्चों के उपचार में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपी संविदा कर्मचारी सुभाष शुक्ला को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ₹8.96 लाख की वसूली के आदेश के विरुद्ध आधी (50% ) राशि 4,48,000 जमा करने आदेशित किया है।
क्या है पूरा घोटाला?
यह मामला ‘मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना’ के तहत जबलपुर में संविदा पर कार्यरत सुभाष शुक्ला से जुड़ा है। समाजसेवी व शिवसेना के उप राज्य प्रमुख शैलेन्द्र बारी द्वारा दायर जनहित याचिका और मुख्यमंत्री को की गई शिकायत के बाद इस बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था।
जांच में पाए गए मुख्य आरोप:
बिना उपचार फर्जी भुगतान: उच्च स्तरीय जांच दल ने पाया कि जन्मजात गूंगे बहरे बच्चों का इलाज करवाए बिना ही ₹8.96 लाख का भुगतान करवा लिया गया।
- फर्जी हस्ताक्षर: दिव्यांग बच्चों के माता-पिता ने बयान दिया कि बच्चों को स्पीच थेरेपी नहीं मिली, बल्कि उनके फर्जी हस्ताक्षर कर शासन की राशि (प्रति बच्चा ₹1.30 लाख) निकाल ली गई।
- ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा: महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, फॉलो-अप न होने के कारण ₹2.27 करोड़ का अनुपयोगी व्यय हुआ और राशि का गबन किया गया।
बर्खास्तगी और कोर्ट का रुख
भ्रष्टाचार की पुष्टि और वसूली राशि जमा न करने को ‘गंभीर कदाचरण’ मानते हुए मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने 20 जनवरी 2026 को सुभाष शुक्ला को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
इस आदेश के विरुद्ध सुभाष शुक्ला ने याचिका (WP 384/2026) दायर की। माननीय उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए निम्नलिखित आदेश दिए हैं: - रिकवरी के मामले में कोर्ट ने शुक्ला को 15 दिनों के भीतर ₹4,48,000 (50% राशि) NHM में जमा करने का आदेश दिया है。
*कोर्ट ने बर्खास्ती के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई है लेकिन निर्धारित समय में वसूली की राशि जमा न करने पर यह स्थगन स्वतः समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेपकर्ता (Intervener) शैलेन्द्र बारी मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने संबंधी आवेदन को भी स्वीकार किया हैl बारी के अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि इसी विषय पर जनहित याचिका (PIL 22469/2025) पहले से लंबित है l इस आधार पर कोर्ट ने शैलेंद्र बारी को मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है l मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को होगी।



