जबलपुर दर्पण

करेंट की चपेट में आने से जलीय जीव की मौत, नानाजी देशमुख पुश चिकित्सालय में कराया गया मगर का पोस्टमार्टम

मनीष श्रीवास जबलपुर दर्पण । जबलपुर जिले सहित ग्रामीण अंचलों में लगे वन परिक्षेत्र सीमावर्ती में आए दिनों किसी न किसी वन प्राणी के करेंट से मौत हो जाना अब शायद आम बात हो गई हैं। और इनकी रक्षा सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामला विगत दिनों जिले की लगीं सीमा ग्रामीण क्षेत्र इंद्राना के ग्राम गाड़ा गनयारी हिरन नदी के किनारे एक भारी भरकम मगर की करेंट लगने से मौत हो गई थीं। 26,27 जनवरी को मृत मिले मगर को ग्रामीणों ने निजी ऑटो में लेकर एक रात्रि गांव में ही रखा। जब इसकी जानकारी अचानक से लोगों को लगीं तो वे सभी हैरान रह गए। तब जाकर इसकी जानकारी वन अमले को दी गई। 28 जनवरी 2026 को वन विभाग एवं ग्रामीण लोगों की सहायता से मृतक वन जीव को नानाजी देशमुख पुश चिकित्सालय में ले जाकर मृत मगर का पोस्टमार्टम कराया गया।
क्या वन परिक्षेत्र में लगे वन सुरक्षा कर्मियों और वन विभागों में बैठे आला अधिकारियों को इन वन जीवों की सुरक्षा को लेकर जंगलों में, गांव के किनारे एवं तार में करेंट लगाकर वन जीवों का शिकार करने वालों पर पहले से ही क्यों सुरक्षा की तैनाती नहीं रहतीं हैं। जब घटनाएं हो जाती हैं तक सभी सक्रीय हो जाते हैं। सवाल वन प्राणी की सुरक्षा को लेकर हैं न कि आए दिनों इनकी बढ़ती मौतों को लेकर हैं। सुरक्षा से ही इनकी रक्षा हो सकती हैं।

वन जीव मगरमच्छ की करेंट मौत की अधिनियम की धारा – वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित) के तहत मगरमच्छ (जो अनुसूची-I में संरक्षित है) की करंट लगाकर हत्या करना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है। इसमें दोषी को धारा 16 (ग) के तहत 3 से 7 साल तक की कैद और कम से कम ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है।
प्रमुख कानूनी धाराएं और प्रावधान
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 धारा 16(1) (c) यह धारा जंगली जानवरों (सरीसृपों सहित) को करंट, जहर या अन्य तरीकों से मारने, घायल करने या परेशान करने पर रोक लगाती है।
सजा का प्रावधान: अनुसूची- 1 के जीव होने के कारण, इसके शिकार या हत्या पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 428 और 429 यदि कोई व्यक्ति पशु को जान से मारता है, तो उसे 2 साल तक की सजा हो सकती है।
धारा 39 (राज्य की संपत्ति): वन्‍यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 39 के अनुसार, संरक्षित जानवर की मृत्यु की रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है, क्योंकि वे राज्य की संपत्ति माने जाते हैं।
नोट: किसी भी वन्य जीव से संबंधित अपराध की सूचना तुरंत स्थानीय वन विभाग या पुलिस प्रशासन को दी जानी चाहिए।

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