अव्यवस्था की मार झेल रहे बैंक उपभोक्ता: नियमों के जाल में उलझे बुजुर्ग, प्रसाधन न होने से महिलाएं शर्मसार

सतीश चौरािया उमरियापान । सेंट्रल बैंक सिलोड़ी की शाखा में इन दिनों उपभोक्ताओं को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है । बैंक प्रबंधन की संवेदनहीनता और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने खाताधारकों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं की मुश्किलों को चरम पर पहुँचा दिया है ।
नियमों की आड़ में आम जनता का उत्पीड़न
बैंक में काम कराने पहुँच रहे ग्राहकों का आरोप है कि असिस्टेंट मैनेजर का व्यवहार बेहद असहयोगात्मक है । ग्रामीणों और बुजुर्ग खाताधारकों को काम के नाम पर इतने जटिल ‘नियम-कानून’ समझा दिए जाते हैं कि वे दस्तावेजों की पोटली लेकर एक काउंटर से दूसरे काउंटर भटकने को मजबूर हैं ।
पीड़ितो का कहना है: “हम सीधा काम पूछने जाते हैं, लेकिन हमें तकनीकी बारीकियों में उलझाकर वापस भेज दिया जाता है । ऐसा लगता है जैसे बैंक हमारी मदद करने के लिए नहीं, बल्कि हमें परेशान करने के लिए बैठा है ।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव:खुले में जाने को मजबूर महिलाएँ
बैंक की सबसे शर्मनाक तस्वीर स्वच्छता सुविधाओं को लेकर सामने आई है । बैंक परिसर में महिला एवं पुरुष प्रसाधन की कोई व्यवस्था नहीं है । घंटों तक कतार में लगने वाली महिला उपभोक्ताओं को भारी मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ रहा है । प्रसाधन न होने के कारण महिलाओं को विवश होकर खुले में जाना पड़ रहा है, जो उनके सम्मान और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसे दावों पर सीधा प्रहार है ।
- असिस्टेंट मैनेजर का अड़ियल रवैया: कागजी कार्रवाई के नाम पर उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर लगवाना ।
बुजुर्गों की अनदेखी: वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई अलग खिड़की या बैठने की समुचित व्यवस्था न होना ।
मानवीय गरिमा का हनन: बैंक परिसर में शौचालय की सुविधा शून्य होना ।
स्थानीय नागरिकों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि बैंक के कामकाज की समीक्षा की जाए और तत्काल प्रभाव से प्रसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि जनता को इस नारकीय स्थिति से निजात मिल सके ।



