अवधपुरी गौरीघाट में 1419 वी रामकथा सुनाते हुए रामभद्राचार्य जी ने की राम जनम के हेतू की व्याख्या

जबलपुर दर्पण । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म सिर्फ विप्र-धेनु, सुर-संत हित के लिए नहीं है, उनका जन्म पूरे जगत के मंगल के लिए है। श्रीरामचरित मानस में गोस्वामी तुलसी दास जी ने ‘राम सत्यसंध पालक श्रुति श्रेतू-राम जनमु जग मंगल हेतू’ चौपाई में इसकी व्याख्या भी की है। इस आशय के मंगल वचन पद्म विभूषण, रामानंदाचार्य जगदगुरु श्री रामभद्राचार्य जी मजाराज ने आयुर्वेद कॉलेज मैदान गौरीघाट स्थित अवधपुरी में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के मंगलाचरण में कही।
श्रीराम जनम के मांगल्य को अनेक उद्धरणों के माध्मम से बताते हुए महाराजश्री ने कहा कि जगत में सब कुछ मंगल हो, इस कारण रामजी का जन्म हुआ है। उन्होंने मानस चौपाई ‘चिदानंद मय देह तुम्हारी’ के माध्यम से भगवान के प्रकट होने संबंधी दिव्यता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान में विकार नहीं होता। निज इच्छा निर्मित तनु में निर्मित का अर्थ उन्होंने प्रकटित बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने भक्तों की इच्छा से वसीभूत होकर अपने शरीर को प्रकट किया। वस्तुत: जगत में जितने लोग और जीव हैं, सभी का मंगल करने के लिए राम का जन्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम माया, तीनों गुण और गो यानी इंद्रिया से परे हैं। उन्होंने कहा कि रावण ने जगत का मंगल जब समाप्त कर दिया। सब कुछ जगत में अमंगल हो रहा था, तब भगवान का जन्म हुआ।
जगत की वासना खंडित करती हैं नर्मदा –
मां नर्मदा की निर्मलता और श्रीराम की सुंदरता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ये सारा संसार जानता है कि नर्मदा ऐसी महारानी नदी है कि किसी में मोहित नहीं होती। नर्मदा का अर्थ है नर्माणि। निर्मलता उनकी पहचान है। वस्तुत: जो जगत की वासना को खंडित कर दे उसे कहते हैं नर्मदा। समुद्र से भी इनका कोई संपर्क नहीं। पर रामजी इतने सुंदर हैं, कि इनको देख कर नर्मदाजी भी मोहित हो गर्इं। नर्मदा ने कहा मेरे तट पर आपको कुटी बनानी ही पड़ेगी। उन्होंने कहा कि रामजी के चरित्र का जादू ही ऐसा है कि कोई कितना भी कोई दुष्ट हो, वो मोहित हो ही जाता है। उन्होंने कहा कि जो सबको खुद में रमाए और खुद सबमें रमें वो हैं श्रीराम।
राम को समझने चाहिए आठ सिद्धांत –
महाराजश्री ने कहा कि परमात्मा श्रीराम को समझने के लिए आठ सिद्धांत चाहिए। ये हैं, व्याकरण उपमाना कोष, आप्तवाक्य व्यवहार, वाक्य शेष, विव्रत्ति और सानिध्य। इन आठ सिद्धांतों के आधार पर हम सिद्ध पदों के अर्थ का निर्धारण करते हैं। वशिष्ठ जी ने श्रीभरत को अयोध्या कांड में बताते हुए कहा कि राम शब्द सिद्ध पद है। हमने इसे नहीं बनाया, अनादि काल से अपौरुषेय राम शब्द की व्याख्या कर रहे हैं। रा का अर्थ हैं देना और म का अर्थ हैं मंगल। तो जो सबको सदा मंगल ही देते रहते हैं उनका नाम है राम। तभी उनके चरित का गायन मंगल भवन अमंगल हारी है। महाराज श्री ने गाइये गणपति जगवंदन, शंकर सुमन भवानी नंदन..स्तुति से कथा का श्रीगणेश किया। उनकी सरस मृदुल मीठी वाणी से गणपति स्तुति सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। इसके उपरांत उन्होंने नीलांभुजग श्यामल कोमलांगं..नमामि रामं रघुवंश नाथम स्तुति से अपने आराध्य भगवान श्रीराम का स्मरण किया। और फिर श्रीगुरु चरण सरोज रज..कहते हुए गुरु वंदन किया।
मानस को समझने संस्कृत आवश्यक –
महाराजश्री ने कहा कि मानस को समझने के लिए संस्कृत पढ़ना आवश्यकता है। व्याकरण न समझने के कारण राम के उदात्त चरित के अर्थ का भी अनर्थ हो जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत का प्रसार-प्रचार और विस्तार हो, इसके लिए वे चित्रकूट में संस्कृत संस्कृति गुरुकुलम की स्थापन कर रहे हैं। इसका भवन तैयार है, जिसका शुभारंभ वे आगामी 14 जनवरी को करेंगे। इससे पूर्व वे 6 माह के अज्ञात वास में रहकर चिंतन करेंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय वैदिक संस्कृति की प्रत्येक विधा को इस गुरुकुल में पढ़ाया जाएगा। हम अपने छहो दर्शन, साहित्य न्याय, वैशेषिक, पूर्व मीमांशा और मानसजी, भागवतजी इस गुरुकुृल में पढ़ाएंगे। यही नहीं संस्कृत के साथ विद्यार्थियों को अंग्रेजी का भी अच्छा अभ्यास कराएंगे, ताकि बटुक विदेशों में जाकर भारतीय वैदिक संस्कृति का प्रचार कर सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए संस्कारधानी से मुझे बहुत सहयोग चाहिए।
संतो का मिला सानिध्य – श्रीराम कथा में जगद्गुरु भगवान का पूज्य संत सुखानंद द्वाराचार्य जगद्गुरु स्वामी राघवदेवाचार्य जी महाराज, आचार्य रामचंद्र दास जी युवराज, दादा पगलानंद जी महाराज, गिरिजानंद जी महाराज, स्वामी रामबहादुर जी महाराज,चंद्रशेखरानंद जी महाराज, योगी राजेश दास, स्वामी सुरेन्द्र दास, का सानिध्य रहा।
मंच पर हुए समरसता के दर्शन –
कथा जिस समररसता के पावन उद्देश्य के लिए हो रही है, उसके सजीव दर्शन मंच पर हुए। ऐसा अवसर प्रथम बार देखने मिला कि किसी भी धार्मिक कथा या आयोजन में समरसता की अलख जगाते हुए सर्व समाज की सहभागिता हो।
राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकी, विधायक सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, नगर निगम अध्यक्ष रिंकूज विज, लेखराज सिंह मुन्ना, प्रो आशुतोष दुबे ने जगद्गुरु का पूजन किया।
आयोजक समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ जितेंद्र जामदार, सचिव अखिल मिश्रा, स्वागत समिति अध्यक्ष गुलशन मखीजा, मुख्य यजमान डॉ राजेश धीरावाणी, पं. रोहित दुबे, पं ब्रजेश दीक्षित ने विधि विधान से पादुका पूजन किया।
सभी यजमानों ने भी पूजन का विधान किया। संदीप जैन ने व्यास पूजन के बाद महाराजश्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया। श्री जैन ने मंच पर उपस्थित द्वाराचार्य राघवदेवाचार्य सहित सभी संतों का पूजन किया।
महाराजश्री का स्वागत नगर के स्वामी राजेश्वरानंद जी, राम बहादुर महाराज, गिरिजानंद महाराज चंद्रशेखरानंद महाराज, राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक, समाज सेवी लेखराज सिंह मुन्ना, नगर भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, आषुतोष दुबे, अश्वनी पराँजपे ने महारजाश्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
41 समाजो के प्रतिनिधि बने यजमान :- ऐसा अवसर प्रथम बार आया है कि किसी भी धार्मिक कथा या आयोजन में समरसता’ की अलख जगाते हुए सर्व समाज की सहभागिता जबलपुर के 41 समाजो के प्रतिनिधि कथा के यजमान बने। इनमे डॉ. राजेश धीरावाणी (गुजराती समाज) मुख्य यजमान होंगे साथ ही सुदर्शन जगदीश चौहटेल (सुदर्शन समाज), दास प्रसाद अहिरवार (अहिरवार समाज), दीपक मेहरोलिया (बाल्मीक समाज), डॉ अमीर चन्द्र सोनकर (सोनकर समाज), बब्वल रजक ठेकेदार (रजक समाज), राजू चौरसिया ‘विश्व’ (चौरसिया समाज ), सुशील सोनी चांदनी ज्वेलर्स (सोनी समाज), प्रवीण वर्मा (कायस्थ समाज), प्रदीप चौकसे, आशीष राय (कल्चुरी समाज ), विजय भावे ( महाराष्ट्र समाज) डॉ. संजय चौधरी (बंगाली समाज), कैलाश अग्रवाल ‘बब्बा जी’ (अग्रवाल समाज ) , रविकिरण साहू (साहू समाज), संजय राठौर (राठौर समाज), किशन बेन (बेन समाज) रामचंद्र राव (तेलगू समाज), प्रवीण गुलाटी (पंजाबी समाज), किशोरी सिंह (लोधी समाज), एड. वीरेन्द्र कुशवाहा (कुशवाहा समाज), लोकराम कोरी (कोरी समाज )लखन ताम्रकार (ताम्रकार समाज), राकेश राजू चक्रवर्ती (प्रजापति समाज), अशोक सोंधिया (रैकवार समाज), पं. आशीष पुजारी (ब्राम्हण समाज) शमन दास आसवानी शंभू भैया (सिंधी समाज), राज वर्मा (बारी समाज) , वीरेन्द्र केशरवानी (केशरवानी समाज ) अनूप खण्डेलवाल (खण्डेलवाल समाज) , सुशील कुमार पटेल (कुर्मी समाज), शरद विश्वकर्मा (विश्वकर्मा समाज ), संतोष मेहरा टिम्बर वाले (झारिया समाज), शशांक यादव (यादव समाज), गुड्डा रूसिया, शंकर लाल चौदहा (गहोई समाज) , राजेश जैन CA (जैन समाज), सुभाष पिल्लई, श्रीमती शीतल पिल्लई (तमिल समाज), जगत सिंह मरकाम ( वनवासी समाज), बद्री प्रसाद सेन (सेन समाज), सत्य प्रकाश नामदेव (नामदेव समाज), अजय गुप्ता (गुप्ता समाज ), ठाकुर सुरेन्द्र सिंह (क्षत्रीय समाज) प्रतिदिन कथा के सपत्नी यजमान होंगे।
मंच का सफल संचालन करते हुए ब्रजेश दीक्षि…



