प्रभु श्रीराम के समरस दर्शन में डूबी संस्कारधानी

जबलपुर दर्पण। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्तुति भए प्रकट कृपाला में आने वाली पंक्ति ‘यह सुख परम अनूपा..’ को रामदृष्टा स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी ने साकार कर दिया। नौ दिवसीय रामकथा की पावन रसधारा ने शहरवासियों को तो पावन किया ही, आयोजक संस्था समरसता सेवा संगठन के समरसता संबंधी विचार की मंत्रध्वनि की दुंदभी बजा दी। ये पहला अवसर था जब रामकथा में सर्व जाति समाज के 42 प्रतिनिधियों ने रामरस की समरस गंगा बहा समरसता की अलख जगाई। नवाह कथा के समापन दिवस पर हर कोई ये समझ गया कि महाराजजी ने कथा की विषय चौपाई ‘राम जनम जग मंगल हेतू’ क्यों रखी। इस कथा ने ये जीवन सूत्र दिया कि रामनाम की प्रेम धारा ही समाज में समरसता का संचार कर सकती है।
नर्मदा की गोद में राघव सेवा-
मां रेवा के भटोली स्थित कालीघाट तट में अलभोर पहुंचे हजारों श्रद्धालु उस समय धन्य-धन्य हो गए, जब उन्होंन जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को राघव सेवा करते देखा। महाराज जी अपने परिकरों के साथ सुबह पांच बजे नर्मदा तट पहुंचे और उन्होंने वैदिक विधान के अनुरूप नर्मदा स्नान किया। स्नानोपरांत उन्होंने वशिष्ठानंदन राघव जी और कौशल्यानंदन राघव जी का भाव विहल होकर अभिषेक और पूजन अर्चन किया। सर्वप्रथम उन्होंने विघ्न विनाशक भगवान गणेश, और फिर महादेव-शालिगराम की पूजन की। तदोपरांत स्रेहित अश्रुधार के बीच अपने राघव जी की पूजा-अर्चना की। जिसने भी महाराजजी का श्रीरामजी के प्रति वात्सल्य भाव देखा वो विहल हो गया।
माताओ नजर न लगा देना –
महाराजश्री ने भटोली पहुंची माताओं को अपने ठाकुरजी के दर्शन कराते हुए कहा कि देखो हमारे राघवजी कितने सुंदर हैं। उन्होंने कहा कि जबलपुर की माताओ नजर न लगा देना। जबलपुर की माताएं नजर बहुत लगातीं हैं। उन्होंने पूरे मनोभाव से प्रभु श्रीराम के श्री विग्रहों का रामानंदी परंपरा के तहत सेवा की। काली घट राममंत्रों से गूंज उठा। राम चरणानुरागी स्वामी जी ने कहा कि उन्हें पता है कि नर्मदाजी राघवजी की सेवा देखना चाहतीं हैं। वे रामजी की भगिनी हैं, और रामजी उनके भ्राता। ऐसे में नर्मदाजी के तट पर राघव ही की सेवा करके धन्य अनुभव कर रहा हूं।
सभी दें शुभकामनाएं –
जगविख्यात मानस मर्मज्ञ, रामदृष्टा, पद्मविभूषण, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुआें से कहा कि आप सभी शुभकामनाएं दें, कि वे अपना कठिन अनुष्ठान पूरा करने के बाद पुन: मुस्कुराता हुआ पुन: रामनाम की महिमा गाने आप सभी के सम्मुख आऊं। समरसता सेवा संगठन के संदीप जैन, अखिल मिश्रा ने नर्मदा तट पहुंचने पर महाराजश्री का स्वागत कर उन्हें वंदन किया। महाराजजी के आदेश पर सभी को प्रभु का प्रसाद और फलाहारी अप्लाहार की व्यवस्था कराई गई।
प्रथम तिलक वशिष्ठ मुनि कीन्हा –
महाराजश्री ने नवाह कथा के समापन दिवस पर पोथी पूजन किया। इससे पूर्व मंच पर राम राज्या भिषेक का महोत्सव मनाया गया। प्रथम तिलक वशिष्ट मुनि कीन्हा..चौपाई के साथ उपस्थित जन समुदाय अपने आराध्य के राज्यारोहण पर भाव विहल था। मंच पर भगवान का तिलक वंदन किया गया। प्रभु श्रीराम की नयनाभिराम झांकी सबका मन मोह रही थी। पूरे पंडाल में मानो उत्तर कांड की खुशी का संचार हो गया था। कथा उपरांत इशिता विश्वकर्मा और मनीष अग्रवाल के भजनों ने समां बांध दिया।
युद्धलीला से गृह आगमन की कथा –
समापन दिवस महाराजजी ने युद्ध लीला से लेकर प्रभु के वनवास से लौटने की कथा सुनाई। रावण का अहंकार, माता सीता की अग्नि परीक्षा, लंका दहन, लक्ष्मण शक्ति सहित कई कथाओं का महाराजजी ने मनभावन गायन किया। सुंदर कांड की लेकर महिमा महाराजश्री ने विलक्षण व्याख्या की। भाव विहल भरत जी का प्रभु से मिलने का वर्णन भाव पूर्ण बन गया। महाराज जी ने कथा के माध्यम से शहरवासियों को आदर्श जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण सूत्र दिए।
समरसता सेवा संगठन की सर्वत्र प्रशंसा –
रामकथा के दिव्य और भव्य आयोजन को लेकर समरसता सेवा संगठन की सबने प्रशंसा की। समरसता मूल्यों के लिए काम कर रही संस्था के अध्यक्ष संदीप जैन का सभा ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। सभी समाजों-जातियों के लोगों के बीच समरसता के भाव बना रहे, इसकी कामना आयोजकों ने की। उल्लेखनीय है कि हर समाजों के शीर्ष मनीषियों की जयंती पर विचार गोष्ठी, तत्समाजिक बंधुओं का सम्मान करते हुए संगठन ने उनकी बात सिर्फ उनके स्वजातीय नहीं बल्कि पूरा समाज माने और जाने, इस भाव से सब सबको जानें सब सबको मानें को विचार मान ध्येय वाक्य रखा। कजलियां-रंग पंचमी जैसे सामाजिक सद्भाव के कार्यक्रम आयोजित कर सबको एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया गया। इसी कड़ी में शहर में आयोजित रामानंदाचार्य परंपरा की रामकथा में सबको यजमान बना कर सबको रामजी की सेना बनाया।
संतो का मिला सानिध्य – श्रीराम कथा में पूज्य संत जगद्गुरु स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी, स्वामी गिरीशांनंद जी सरस्वती, साध्वी कृष्णा निशा तिवारी के साथ पूज्य संतो का सानिध्य मिला।
समरसता सेवा संगठन के आगामी त्रिवर्षीय कार्यकाल हेतु अध्यक्ष श्री पवन पांडे एवं सचिव श्री मनोज सेठ बने –
पूज्यपाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी की पावन उपस्थिति में समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन ने संगठन के नए अध्यक्ष हेतु श्री पवन पांडे वरिष्ठ पत्रकार, एवं नए सचिव हेतु श्री मनोज सेठ के नाम की घोषणा की। नवीन अध्यक्ष एवं सचिव की घोषणा का सभी सदस्यों एवं उपस्थित श्रोताओं ने करतल ध्वनि करते हुए स्वागत किया।
जगद्गुरु स्वामी आजीवन संरक्षक एवं संदीप जैन आजीवन संस्थापक अध्यक्ष रहेंगे –
नई घोषणा के उपरांत जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने मंच से नए पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुए कहा समरसता सेवा संगठन के नए अध्यक्ष एवं नए सचिव बन गए है, इस संगठन का शुभारम्भ मैंने ही किया था इसीलिए अपने अधिकार से यह घोषणा करता हुँ कि श्री संदीप जैन इस संगठन के आजीवन संस्थापक अध्यक्ष रहेंगे और मै स्वयं आजीवन इस संगठन का संरक्षक रहूँगा।
समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री संदीप जैन ने अपने उद्बोधन में समरसता सेवा संगठन की तीन वर्षों की यात्रा पर संक्षिप्त प्रकाश डाला साथ ही उन्होंने इन तीन वर्षों संगठन को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने के लिए संगठन के सदस्यों के साथ ही सर्व समाज के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की।
इन्होने किया पादुका पूजन –
कथा पूर्व रामनन्दाचार्य को प्राचीनतम पादुकाओ का पूजन माल्यार्पण आरती श्रीमती माला राकेश सिंह , श्रीमती बर्षा राकेश अग्रवाल , डॉ राजेश धीरवानी,जुगराजधर द्विवेदी ,डॉ जितेन्द्र जामदार , राजकुमार पटेल , रानू तिवारी , श्रीमती रश्मि मनीष गुप्ता , कर्नल एनिमेय मोहले, पंकज शाह , आचार्य रोहित दुबे ,प्रकाश मालपानी , सुधीर बुद्धिमती सतीश राय , प्रदीप अग्रवाल गुड्डा , कपिल दुबे , श्रीराम शुक्ला , विनीत तिवारी , तनिष्क सिंह ,अंकित निधि खुराना , राजेश अग्रवाल गुड्डू , नरेंद्र अग्रवाल , बब्बन रजक , वीरेन्द्र केशरवानी, दीप माला सोनकर , राजेश अग्रवाल , लखन ताम्रकार , सुधीर नायक , भोला राय , कृष्ण शेखर सिंह , सौरभ दुबे , उत्तम चन्द्र गुप्ता ,कमलेश अग्रवाल , अच्युत अमन वाजपेई, मेहर यादव , तारक चौहान , संजय गर्ग , श्रीमती शारदा कुशवाहा,विराट शर्मा , महेन्द्र पांडेय , नीरज गर्ग , आदित्य शुक्ला ,
इशिता विश्वकर्मा के भजनो से मंत्र मुग्ध हुए श्रोता – श्रीराम कथा के अंतिम दिवस पर सारेगामापा विजेता जबलपुर की गौरव बेटी सुश्री इशिता विश्कर्मा ने भगवान राम के भजनो की प्रस्तुति दी। उनके ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैजानिया सुनकर न सिर्फ श्रोता अपितु जगद्गुरु भी मंत्र मुग्ध हो गए। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी ने भी अपनी वाणी से इस भजन को गाया।
इशिता विश्वकर्मा के साथ ही प्रतिदिन की भांति कथा समापन पर देवी गुण गायक मनीष अग्रवाल मोनी, रुपाली कुसुमकर एवं अन्य गायकों ने भजनो की प्रस्तुति दी।



