बरगी हादसा में मजहब नहीं, सिर्फ ‘जान’ देखी- सरबजीत नारंग

जबलपुर दर्पण । बरगी बांध में हुये क्रूज हादसा में चीख-पुकार के बीच मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश हुई, जिसने समाज के दोहरे मापदंडों को आईना दिखा दिया। रमजान, जो पास ही पुल निर्माण कार्य में लगा था, उसने यह नहीं सोचा कि डूबने वाला कौन है, किस धर्म का है या किस जाति का है। उसने 25 फीट की ऊंचाई से मौत की परवाह किए बिना छलांग लगा दी। मशहूर ब्लड डोनर सरदार सरबजीत सिंह नारंग ने कहा कि रमजान के जेहन में कोई ‘धार्मिक ग्रंथ’ नहीं, बल्कि ‘इंसानियत का फर्ज’ था। उसने डूबती हुई जिंदगियों को बचाने के लिए खुद की जान दांव पर लगा दी।
वक्त की पुकार इंसानियत ही धर्म है। आज फिर साबित हो गया कि इंसानियत जीती है और नफरत के सौदागर हारे हैं। उन्होंने कहा कि रमजान जैसे नायकों का हर वर्ग को सम्मान करना चाहिए उन्होंने सरकार से रमजान को बड़ी राशि देकर पुरस्कृत करने की मांग की है।



