आय से अधिक संपत्ति मामले में डॉ आदर्श विश्नोई के खिलाफ जांच शुरू, सीएमएचओ ने जारी किया नोटिस, शिकायतकर्ता के बयान दर्ज

जबलपुर दर्पण । सेडमैप आउटसोर्स घोटाले और एचपीवी वैक्सीनेशन घोटाले में लिप्त नर्सिंग होम शाखा के जिला नोडल अधिकारी और पाटन के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ आदर्श विश्नोई की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते 9 जून को समाजसेवी और शिकायतकर्ता अरविन्द मिश्रा ने कलेक्टर जनसुनवाई में उपस्थित होकर डॉ विश्नोई के द्वारा अवैध कमाई कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक नए घोटाले के संबंध में 164 पन्नों का विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था। इस भारी भरकम पुलिंदे में डॉ बिश्नोई की अवैध संपत्तियों के पुख्ता सबूत शामिल थे। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय ने सीएमएचओ स्तर से 15 दिनों के भीतर इस पूरे मामले का निराकरण करने का आदेश जारी किया था। जिसके पालन में सीएमएचओ डॉ नवीन कोठारी द्वारा जहां डॉ विश्नोई से शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों का बिंदुवार लिखित जवाब प्रस्तुत करने के लिए पत्र जारी किया गया था, वहीं उनके द्वारा 18 जून 2026 को एक और पत्र जारी कर शिकायतकर्ता को भी कार्यालय में दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर शिकायत के संबंध में अपने बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था।
बिना शासन की अनुमति डेढ़ करोड़ की चल-अचल संपत्ति खरीदी :- शिकायतकर्ता द्वारा 18 जून 2026 को सीएमएचओ कार्यालय में उपस्थित होकर 125 पन्नों का एक और पुलिंदा सबूतों के रूप में पेश किया और बताया कि डॉ विश्नोई ने अपने व परिवार के सदस्यों के नाम पर बिना शासन की पूर्व अनुमति के करीब एक करोड़ दस लाख रुपये मूल्य की 5 अचल संपत्तियां मझौली, पाटन और जबलपुर में खरीदी हैं। इतना ही नहीं, डॉ विश्नोई ने पांचों संपत्तियों को अपने व अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर सरकारी खसरे में दर्ज भी करवा लिया है। अचल संपत्ति के अलावा, डॉ विश्नोई ने शासकीय सेवा के दौरान सक्षम अधिकारी की बिना पूर्व अनुमति के चल संपत्ति के रूप में 3 कारें भी खरीदीं। उनके द्वारा किये गए ये सभी कृत्य मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 19(2)(2) का खुला उल्लंघन हैं जिसमें प्रावधान है कि शासकीय सेवक शासन की पूर्व मंजूरी के बिना स्वयं अपने या अपने कुटुम्ब के सदस्य के नाम से कोई भी चल अचल संपत्ति न तो खरीदेगा और न ही बेचेगा।
बिना अनुमति 5 से अधिक विदेश यात्राएं : – शिकायतकर्ता द्वारा यह भी जानकारी उजागर की गई कि डॉ विश्नोई द्वारा राज्य शासन की अनुमति के बिना वर्ष 2017 में यूएसए व वर्ष 2018 में दुबई की यात्रा की गई। 17 जून 2026 को बिना शासन की अनुमति के एक बार फिर डॉ विश्नोई जबलपुर एयरपोर्ट से कोलंबो श्रीलंका के लिए 5 दिवसीय विदेश यात्रा के लिए रवाना हुए। कुल मिलाकर डॉ विश्नोई ने बिना सक्षम अनुमति के 5 से अधिक विदेश यात्राएं की हैं। बिना सक्षम अनुमति के डॉ विश्नोई द्वारा विदेश यात्रा करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 का स्पष्ट उल्लंघन है।
अस्पताल पंजीयन घोटाला :- शिकायतकर्ता द्वारा यह भी आरोप लगाया गया कि डॉ विश्नोई ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर जबलपुर के अयोग्य व अनुपयुक्त अस्पतालों के पंजीयन अथवा नवीनीकरण दिलाने के एवज में करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। डॉ विश्नोई ज्यादातर अस्पतालों के मामले में इंस्पेक्शन अथारिटी होने से अस्पताल का निरीक्षण कर इंस्पेक्शन रिपोर्ट बनाते हैं और उनके पक्ष में पंजीयन जारी करने की अनुशंसा पर्यवेक्षण अधिकारी सीएमएचओ को करते हैं। इंस्पेक्शन अथारिटी की इसी अनुशंसा के आधार पर आगे सीएमएचओ के द्वारा अस्पतालों को पंजीयन व लाइसेंस प्रदान किया जाता है। विगत 4 वर्षों में डॉ विश्नोई ने चंद हजार रुपयों के लालच में बिना जरूरी कागजात, बिना दमकल वाहन के रास्ते वाले व बिना वैकल्पिक फायर एग्जिट वाले या बिना पार्किंग वाले भवनों में या पूरी तरह आवासीय भवनों में या नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण करने वाले करीब 50 से अधिक भवनों में अस्पताल चलाने का लाइसेंस बांट देने की अनुशंसा कर दी। जिन अस्पतालों के पास अनिवार्य भवन पूर्णता प्रमाणपत्र तक उपलब्ध नहीं था, उनसे मोटी रकम लेकर निरीक्षण के दौरान जानबूझकर अपनी आंखें बंद रखी गईं ताकि अवैध निर्माण सामने न आ सके। उनकी कमियों को फाइल में दफन कर दिया गया और चमचमाती फर्जी क्लीन चिट रिपोर्ट अनुशंसा सहित तैयार कर दी गई। इस भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो तब देखने को मिली जब उन अस्पतालों को भी मंजूरी दे दी गई जिन्हें पहले अनुपयुक्त घोषित कर उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका था। इस प्रकार मौत के कुओं को अस्पताल संचालन का लायसेंस देने की अनुशंसा कर बेहद शातिराना तरीके से डॉ विश्नोई ने मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रुजोपचार अधिनियम 1973 और नगर पालिक नियम अधिनियम 1956 को ताक पर रख दिया। जिसके लिए उनके विरुद्ध कार्यवाही जनहित में जरुरी है।



