छोटे से गाँव की बेटी ने मंच पर बिखेरे शब्दों के जादू, बनीं उभरती हुई कवयित्री

जबलपुर दर्पण । शब्दों में जब जज़्बा और सच का अहसास मिलता है, तो वो कला बन जाती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है शहपुरा भिटौनी के छोटे से गांव खैरी इमलिया18 की रहने वाली बेटी कु०वर्षा वैदेही लोधी ने। तमाम सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच, एक छोटे से गाँव से निकलकर कु०वर्षा वैदेही लोधी ने एक बेहतरीन कवयित्री के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वे अपनी कविताओं में सामाजिक मुद्दों को उठाती हैं। उनके पास सामाजिक समस्याओं को कविता रुपी शब्दों में पिरोकर समाज के समक्ष रखने की कला है। जब वे मंच पर सामाजिक समस्याओं को काव्यशैली में प्रस्तुत करती हैं, निश्चित ही सबका ध्यान उन सामाजिक समस्याओं पर केन्द्रित होता है।
साहित्य के प्रति उनके इसी जुनून ने उन्हें नरसिंहपुर के त्रिमूर्ति क्लब के महाकवि सम्मेलन तक पहुँचाया है। हाल ही में त्रिमूर्ति क्लब के महाकवि सम्मेलन में जब उन्होंने अपनी रचना ”मुझको कुछ करने दो पापा” का काव्य पाठ किया, तो वहाँ मौजूद सभी श्रोताओं ने उनका उत्साहवर्धन किया। एवं त्रिमूर्ति क्लब के संस्थापक एडवोकेट डाॅ. शंकर सहर्ष ने उनको अपना आशीर्वाद प्रदान किया और उन्हें अपनी संस्था के समान पत्र से सम्मानित किया।
आज कु०वर्षा वैदेही लोधी न सिर्फ अपने गाँव और ज़िले का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि उन हज़ारों लड़कियों के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं जो छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखती हैं। उनका मानना है कि ‘अगर आपके पास प्रतिभा और मेहनत करने की लगन है, तो कोई भी परिस्थिति आपके सपनों को रोक नहीं सकती।’ आने वाले समय में, वे अपनी कविताओं का संग्रह, सयुंक्त परिवार और आदीवासी समाज पुस्तक प्रकाशित करना चाहती हैं।
छोटे से गाँव की इस ‘बेटी’ ने यह साबित कर दिया है कि आसमान छूने के लिए पंखों की नहीं, बल्कि बुलंद हौसलों की ज़रूरत होती है। कु०वर्षा वैदेही लोधी की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।



