संस्कारधानी नाम की सार्थकता ऐसे विद्वत मनीषियों से सार्थक है

जबलपुर दर्पण । संस्कारधानी जबलपुर के ख्यातिलब्ध साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद के ग्यारहवीं पुण्य तिथि का गरिमामय आयोजन श्रीजानकीरमण महाविद्यालय मे उनके मूर्ति स्थल पर आयोजित किया गया | शुभारंभ प्रो.राजेश कुमार वर्मा कुलगुरु रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय एंव अतिथियों के द्वारा उनकी मूर्ति पर पूजन-अर्चन एवं पुष्पांजलि के साथ किया गया | तदोपरांत उपस्थित अतिथियों के उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया | अतिथियों में शरदचंद पालन ने पं.हरिकृष्ण त्रिपाठी जी को निष्ठावान शिक्षाविद बताते हुए अपने संस्मरण साझा किये, डाॅ कौशल दुबे के द्वारा त्रिपाठी जी के संस्मरण बताते हुए कहा की श्रीजानकीरमण महाविद्यालय साहित्यिक संस्थाओ का केन्द्र उनके कारण बना है वरिष्ठ डाॅ उदयभानु तिवारी ने कहा की संस्कारधानी नाम की सार्थकता ऐसे ही व्यक्तित्वों के कारण सार्थक है अशोक मिश्र ने कहा श्री त्रिपाठी का व्यक्तित्व अनुशासित और अनुकरणीय रहा है उमाशंकर दुबे ने कहा शिक्षा ,साहित्य और पत्रकारिता की त्रिवेणी बताया । अभिमन्यु जैन ने अपने संस्मरण साझा किए एवं अन्य उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। सुरेश मिश्र विचित्र ने श्री त्रिपाठी को साहित्य शिक्षा का इनसाक्लोपिडिया बताते हुए कहा कि नये पुराने साहित्यकारों की अघतन जानकारी रहती थी ऐसे लोग विरले ही होते हैं ।
कार्यक्रम में प्रमुख रुप से डाॅ गंगाधर त्रिपाठी,डाॅ अनामिका सिंह, गोपाल प्रसाद, मुकेश श्रीवास्तव,राखी बाजपेई, मानसी गौतम, कंचन दुबे,आदि बड़ी संख्या मे उपस्थिति रही । कार्यक्रम का संचालन डॉ.आनंद सिंह राणा ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ.अभिजात त्रिपाठी के द्वारा किया गया ।



