नई श्रम संहिता से श्रमिकों का संरक्षण नहीं, शोषण होगा: फेडरेशन का विरोध प्रदर्शन

जबलपुर दर्पण । श्रमिकों, कार्मिकों के शोषण को बढ़ावा देने, प्रशासन , प्रबंधन और उघोगपतियो के हित संवर्धन के लिए केन्द्र सरकार पुराने 29 सभी श्रम क़ानून खत्म कर उघोगपतियो के हित में चार नई श्रम संहिता,नये कानून लें आई है। नई श्रम संहिताओं खिलाफ और इसको रद्द करने, बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार जनविरोधी नीतियों, बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में देश के 10 राष्ट्रीय श्रम संगठनों के आव्हान पर आयोजित हड़ताल के समर्थन में मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने वृहद स्तर पर धरना, प्रदर्शन किया। जिसमें अभियंता गण और कर्मचारी गण उपस्थित थे।
अभियंताओं से कार्यपालन अभियंता श्री अमित सक्सेना,मध्यप्रदेश विधुत कर्मचारी संघ फेडरेशन महामंत्री राकेश डी पी पाठक, सीताराम कुरचानिया,आर एस परिहार,दिनेश दुबे, अनूप वर्मा,उमाशंकर दुबे,अवनीश तिवारी, राजेश मिश्रा,रवि चौबे, श्रीकांत दुबे, डी के चतुर्वेदी,अजय चौबे, मनोज पाठक,मोहित पटेल, दिलीप पाठक, संजय सिंह,अक्षय श्रीवास्तव, सहित बड़ी संख्या में अभियंता गण और फेडरेशन के साथी गणों ने इस काले कानून का विरोध किया।
अमित सक्सेना ने कहा कि उघोग हित के साथ कमचारियों के हित संवर्धन का ध्यान रखा जाना चाहिए।
फेडरेशन महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि इन श्रम संहिता के लागू होने कारण अब श्रमिकों, कार्मिकों की सुरक्षा, सुविधा और समस्याओं के समाधान होना मुश्किल हो जाएगा, वल्कि उघोगपतियो ,प्रंबधन की मनमानी चलने लगेगी। श्रम संगठनों का रजिस्ट्रेशन,संचालन और श्रमिकों, कार्मिकों के हित संवर्धन और प्रगति के लिए मांग करना, आंदोलन, सत्याग्रह करना मुश्किल हो जाएगा। सब प्रबंधन, प्रशासन और उघोगपतियो के रहमो-करम पर निर्भर हो जाएगा। तत्काल बिजली कंपनियों के निजीकरण को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि इससे अभियंताओं, कमचारियों से ज्यादा आम जनता का नुक़सान होगा।राकेश डी पी पाठक ने कहा कि न्यू पेंशन की जगह पुरानी पेंशन ही लागू होना चाहिए। बिजली सेक्टर आज भी कंपनीकरण का दुष्परिणाम भोग रहा है। आज कर्मचारियों, पेंशनर्स के साथ उपभोक्ता भी परेशान हैं। अतः कंपनीकरण बंद होना चाहिए। राकेश पाठक ने कहा कि पहले सरकार उघोगपतियो के साथ श्रमिकों का विशेष ध्यान रखकर कानून बनातीं थी, अब नहीं।इन श्रम संहिताओं ने मालिक और पूंजी के पक्ष में संतुलन को और झुका दिया है। श्रमिकों, कार्मिकों की छंटनी और लाॅक आउट को आसान बना दिया है। आज जब काम, नौकरी पहले से अधिक असुरक्षित, अनुबंध आधारित और असंगठित हो चुका है तब सरलीकरण का अर्थ उघोगपतियो को यह अधिकार दे देना वे जब चाहें मजदूरों को निकाल बाहर कर सकते हैं। क्योंकि पहले 44 कानून मजदूरों, कार्मिकों को अलग-अलग सुरक्षा प्रदान करते थे।
आज बिजली बिजली सेक्टर में 15 सालों से भी ज्यादा समय से संविदा, आउट सोर्स कर्मचारी गण नियमित होने की बाट जोहते हुए अपनी आधी सेवा आयु पूर्ण कर चुके हैं। अभी भी उनका भविष्य अंधकारमय है। फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने कहा कि सरकार इन श्रम संहिताओं को वापस ले और बिजली सेक्टर की सभी कंपनियों में कार्यरत सभी संविदा और आउट सोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त नियमित किया जाए। पुरानी पेंशन बहाल की जाएं। वहीं पेंशन प्राप्त कर रहे सभी श्रेणी के पेंशनरों की पेंशन की सुरक्षा की गारंटी राज्य और केंद्र सरकार लें। मध्यप्रदेश में नियमित कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स को भी महंगाई राहत, परिवार पेंशन राहत दी जाएं। राज्य बंटवारे की धारा 49 को समाप्त किया जाए। यह धारा बर्ष 2000 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों पर लागू नहीं होती है किन्तु राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों की मनमानी से लाखों पेंशनर्स परेशान हो रहे हैं और उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। यह तत्काल बंद होना चाहिए।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में उपस्थित जनों में आर के परोहा, सुधीर कुमार मिश्रा,विनय पाठक, संजय सिंह, संदेश यादव, शिवहरि श्रीवास्तव, विजय तिवारी किसलय, अविनाश तिवारी, सुरेन्द्र तिवारी, बसंत मिश्रा, अभिनव कृष्ण त्रिपाठी, मनोज पाठक, राजेश मिश्रा, दिलीप पाठक, दयाशंकर, विजय डोंगरे, सतेन्द्र सुहाने, मोहित पटेल अजय,दुबे, मनोज सिंह,शुभम चंदेल, विशाल नेमा, राजेन्द्र चक्रवती,रवि बहादुर सिंह,एच एम मसूंरी, संजय अहिरवार,एस के चौधरी, दिलीप यादव, विवेक चौबे, आशीष गुर्गे, शैलेन्द्र जैन आदि थे।



