माझी मछुआरा समाज की लाचारी, बेरोजगारी, कमजोरी के जिम्मेदार मध्य प्रदेश सरकार

मध्यप्रदेश में माझी मछुआरा समाज बहुत बड़ी संख्या में निवास कर रहे हैं । माझी मछुआरा समाज के छोटे छोटे व्यवसाय नदी के किनारे रेत पर शकरकंद का उत्पादन करना, नदी , तालाब , झील पर नाव चलाना , मछली मारना , और अनेक प्रकार की सब्जियां उगाने जैसे छोटे छोटे व्यवसाय को पिछले 15 वर्ष पूर्व किया जाता रहा है। सरकार के एजेंट रेत माफियाओं के द्वारा मछुआरा व्यवसाय छीन लिया गया है । जिससे मछुआरा समाज की रोजी-रोटी कमाने का रास्ता खत्म हो गया हैं । वर्तमान में मछुआरों की आर्थिक व्यवस्था , व्यवसाय व्यवस्था , सामाजिक सम्मान व्यवस्था , राजनैतिक व्यवस्था , चरमरा कर खत्म हो गई है । वर्तमान में माझी समाज लाचार और कमजोर होकर दैनिक जीवन गरीबी मै गुजर रहा है । इन्हीं परिस्थितियों में माझी मछुआरा समाज का उत्थान व विकास स्थाई होकर रुक गया है । मध्य प्रदेश सरकार इन सभी मछुआरा समाज के दैनिक जीवन की सभी परिस्थितियों का जिम्मेदार है ।
मध्य प्रदेश सरकार मछुआरों के विकास के लिए मछुआ कल्याण बोर्ड की स्थापना किया था । परंतु सरकार के द्वारा नदियों की रेत और घाट को ठेकेदारों से मिलकर बेचना । बड़े-बड़े सरकारी तालाब , जलाशय सरोवर को अन्य समाज के हवाले करना । और अधिक पैसे वाले ठेकेदारों को अधिक दामों में मत्स्य योजना का लाभ दिलाने जैसे निती से मछुआरा समाज की आर्थिक परिस्थिति को सरकार ने कमजोर कर दिया है। माझी मछुआरा समाज पर सौतेला व्यवहार कर, गरीब मछुआरों की लाचारी , बेरोजगारी , कमजोरी, और मछुआरा गरीब परिवार के जीवन का सरकार मजाक उड़ा रही है। जो माझी मछुआरा समाज की एक चिंता का विषय बना हुआ है । सरकार के प्रति माझी मछुआरा समाज के द्वारा पूरे मध्यप्रदेश मै नाराजगी देखने मिल रही है। मध्य प्रदेश मछुआरा समाज युवा परिषद प्रदेश अध्यक्ष मनीष माझी और माझी मछुआरा समाज के सभी लोगों ने उत्थान व विकास सहित मत्स्य योजना ,नदी , जलाशय से संचालित व्यवसाय व अन्य सामाजिक रोजगार का लाभ दिलाने की मांग किया है ।



