मध्य प्रदेशसतना दर्पण

नदी पुनर्जीवन के कामों ने दिया बरुआ को जीवनदान

भर गए तालाब और डग प्वाइंट, कभी था जंगल, फिर हुआ वीरान,अब फिर लहलहाने लगे पेड़

उचेहरा । नदी  पुनर्जीवन  को लेकर जहां शासन-प्रशासन कई तरह के काम कर रहा है मगर
कुछ स्थानों पर तो खानापूर्ति हो रही है और कुछ जगह काम हो रहा है, जहां काम हो रहा है वहां तो वैसे ही दिख रहा है तालाब में पानी भर गया डग पॉइंट में पानी भर गया। जंगल लह लगाने लगे मगर कुछ जगह केवल खानापूर्ति करके छोड़ दिया गया है।

 गौरतलब है कि जनपद पंचायत उचेहरा की ग्राम पंचायत खुझा में बनाए गए नदी पुनर्जीवन के तहत तालाब और डग पॉइंट में पानी भर गया है जिससे क्षेत्र में जल स्तर बढ़ने के साथ ही पेड़ पौधे भी दिखने लगे हैं।  बता दें कि उसकी कई ग्राम पंचायतों में नदी पुनर्जीवन के काम किया जा
रहा है खूझा में काफी काम दिलचस्प है।

गौरतलब है कि आदिकाल से कलकल करती सदानीरा नदियाँ स्वच्छ जल का स्रोत रही हैं। समाज ने उनके जल का विविध उपयोग कर अपनी प्यास बुझाई है। गरीबों ने आजीविका कमाई है। किसानों ने खेती की जरूरतें पूरी की हैं। वह, समाज की निस्तार जरूरतों को पूरा करने वाला भरोसेमन्द साधन भी रहा है। यह पानी नदियों में रहने या पलने वाले जलचरों और जलीय वनस्पतियों की भी जरूरतों को पूरा करता है। नदीतंत्र में बहने वाला पानी महत्त्वपूर्ण संसाधन,
प्राकृतिक जलचक्र का अन्तरंग एवं अविभाज्य घटक और नदीतंत्र के प्राकृतिक दायित्वों को अंजाम देने वाला प्राकृतिक साधन है।

जनपद पंचायत उचेहरा के अंतर्गत नदी पुनर्जीवन के तहत दर्जनों ग्राम पंचायत में जल संग्रह के लिए कार्य कराए जा रहे हैं बता दें कि रामपुर पाठा  में करोड़ों की लागत से बनाया गया तालाब आज भी सूखा पड़ा है।

नदी पुनर्जीवन को ऐसे समझें

वर्षा ऋतु में हर नदी में पर्याप्त पानी बहता है इसलिये वर्षा ऋतु में प्रवाह बढ़ाने के प्रयासों की जरूरत नहीं है। इस अवधि में केवल जल संचय के तरीकों के बारे में सोचा जाना है तथा प्रयास किये जाने हैं।

नदी पुनर्जीवन सम्बन्धी समझ की अपेक्षा है कि प्रत्येक नदी के प्रवाह को पूरे साल जल स्तर पर बनाए रखने के लिये उसके कछार के बाढ़ के पानी की वांछित मात्रा को उसी कछार में संरक्षित किया जाये। कछार में संरक्षित पानी का उपयोग सूखती नदी के घटते प्रवाह को इष्टतम स्तर पर बनाए रखने के लिये किया जाये।

इसके लिये उपयुक्त मात्रा में वांछित संरचनाओं (आधुनिक तथा परम्परागत) का निर्माण किया जाये। वांछित संरचनाओं में बचे पानी तथा नदी जल का कुशल एवं बुद्धिमत्तापूर्वक उपयोग किया जाये। नदी जल के कुशल एवं बुद्धिमत्तापूर्वक उपयोग का असर प्रवाह में वृद्धि करेगा।

इनका कहना है
 नदी पुनर्जीवन के तहत बनवाए गए तालाब और जब पॉइंट में पर्याप्त पानी भर गया है
अरविंद तिवारी
सचिव ग्राम पंचायत खूझा

नदी पुनर्जीवन के तहत जल संग्रह के लिए कई प्रकार के कार्य ग्राम पंचायत
में कराए जा रहे हैं ।
हरि शंकर सिंगरोल सरपंच

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