मैहर बना भ्रष्टाचार का गढ़

दैनिक जबलपुर दर्पण से ऋषिकेश त्रिपाठी कि रिपोर्ट सतना।
ऐसा कोई सरकारी दफ्तर हो या सरकारी ठेका सभी में राजनेताओं का परसेंट फिक्स सबका साथ खुद का विकासः विष्णु नाथ पांडेय
सतना जिला का मैहर विकासखण्ड के अन्तर्गत गांव से लेकर शहर तक भ्रष्टचार चरम पर है यह मैहर तिलौरा के ही समाजसेवी विष्णु नाथ पांडेय का है उन्होंने मैहर विकासखण्ड के अन्तर्गत सभी ग्राम पंचायतों से लेकर नगरपालिका तक का है जहां भ्रष्टाचार का आलम इतना बड़ा हो चुका है कि आम नागरिक अपने आप में ठगा महशुस कर रहा है भरास्टाचर जिसे बढ़ाने में देश प्रदेश के कोई और लोग नही बल्कि मैहर के नेता जी लोग है जो मैहर में रहके वा मैहर से बाहर रहते हुए भी खूब प्रशासनिक अधिकारियो कर्मचारियों को शह दे कर जनता को भी दिन दहाड़े खुली आंखों में डकैती कर लेते है और मैहर की भोली भाली जनता सिर्फ देख रही है और नेता जी के चमचे यानी पार्टी के छोटे कार्यकर्ता आमजनता को गुमराह करके आम जनता को समझाते हैं आप का विकास हो रहा है कैसा विकास है पहला उदाहरण मैहर तहसील के रोड का आज सरकार द्वारा रोड बनाने का ठेका एक ठेकेदार को देती है और ठेकेदार काम करने के पहले हमारे नेताओं से मुलाकात करते हैं वहां नेता जी का चमचा तैयार रहता है जो उदाहरण के लिए एम पी आर डी सी ( MPRDC) की रोड हो चाहे प्रधानमंत्री रोड निर्माण हो चाहे सरकार द्वारा कोई भी रोड हो नेता जी तय करते है कि रोड इस तरह बनेगी और ठेका अगर पाच करोड़ का है तो दस लाख की रकम चमचों द्वारा नेता जी के पास वाया वाया पहुंचा दिया जाता है फिर ठेकेदार महोदय अपनी मर्जी से घटिया पुलिया निर्माण करते हैं सड़क का बेस घटिया तरीके से बनाते हैं लाल मुरूम की जगह खेत या सरकारी जमीनों वा वन विभाग की जमीन से अवैध मिटटी उत्खनन कर बेस बना देते है बेस बनाने में चालीस एमएम की काली गिट्टी बिछानी है तो उसे पहाड़ों के खराब लाल पत्थर को अवैध क्रेशर प्लांट डालकर वन विभाग के जमीन से खराब पत्थर को उत्खनन कर पीस कर रोड के बेस में डाल देते हैं और रोड बनकर तैयार हो जाती सरकारी इंजिनियर उस रोड को पास कर देते है इसमें इंजिनियर महोदय जी का हिस्सा भी पहुंच जाता है फिर क्या एक साल भी रोड नहीं चलती पता चलता है कि पहली थोड़ी बारिश में ही रोड की पुलिया वा रोड बह गई कही रोड बहगाई अगर रोड नहीं बहपाई तो रोड बनने के चार माह बाद वहीं नई रोड खड्डे में तब्दील हो जाती हैं जिसका खामियाजा कोई और नहीं बल्कि हमारी भोली भाली जनता भोगती है दूसरा उदाहरण सरकारी जमीन घोटाला हमारे मैहर विकासखण्ड के अन्तर्गत बहुत बड़ा सरकारी जमीन घोटाला व्यापक पैमाने में संचालित है हमारे छोटे बड़े नेता जी वा नेता जी के चमचे खूब मैहर शहर वा मैहर विकासखण्ड के अन्तर्गत ग्रामपंचायतों में पड़ी सरकारी जमीन में खूब कब्जा दर्ज कराने की होड़ लगी हुई है जिसमें मैहर के बिजनेसमैन भी सहभागी बनें हुए हैं इस कड़ी में कुछ पटवारी कुछ तहसीली के चपरासी की अहम भूमिका अदा कर रहे है सरकारी अमला(प्रशासन) रातो रात मध्य प्रदेश सासन की आराजी पर कब्जा दर्ज कर दिया जाता है जिसमें आर आई साहब पटवारी साहब नायब तहसीदार साहब आदि आदि सम्मलित्त रहते है जिसे एक साल बाद उसी जमीन का पट्टा बना दिया जाता है फिर बाजार में वही जमीन बिक जाती है वा पैसे का बटवारा के लिया जाता है हलकी नेता जी का परसेंट पहले ही फिक्स हो जाता है प्लॉट के लोकेसन के हिसाब से और जो बिजनेसमैन है वो अपनी लीज बनाकर उत्खनन करने लगते हैं मैहर की गरीब जनता को पता भी नहीं चलता की हमारे मैहर के अंदर क्या चल रहा है जनता अपने किसानी वा परिवार के भरण पोषण में ही व्यस्त रहती हैं आज मैहर के अंदर व्यापक तौर पर सतना जिले में पहला स्थान पर चल रहा है और नेता जी के चमचे कहते फिरते है कि मैहर में विकास हो रहा है सही बात है भारस्टाचार का विकास सच में हो रहा है कोई सक नहीं तीसरा उदहारण ग्रामपंचायतों का आज मैहर तहसील के अंतर्गत सचिव वा सरपंच मिलकर जहा घटिया निर्माण कराने में महारथ हासिल कर चुके हैं चाहे आर सी सी रोड हो चाहे आर सी सी नाली का निर्माण हो चाहे ग्राम पंचायत के अंदर स्कूल भवन समुदयक भवन आगनवाड़ी भवन आर आई पटवारी भवन पंचायत भवन आदि जैसे कोई भी सरकारी भवन का निर्माण हो रहा हो या रिपेयरिंग का काम हो घटिया निर्माण में पंचायतें बहुत आगे निकल चुकी है पंचायत के नागरिक अगर जागरूक होकर शिकायत करता भी है तो उच्चाधिकारी सिर्फ खाना पूर्ति कर चले जाते हैं कारण ये है कि जनपद पंचायत सी ई ओ साहब और उनकी टीम को सासन द्वारा दी जा रही सैलरी से परिवार नहीं चला पा रहे हैं जिसे सचिव महोदय जी का लिफाफा पूरा करता है जागरूक नागरिक कोई भी शिकायत कही भी करदे कोई फर्क नहीं 181 नंबर पर कम्पलेन करने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि जिला सी ई ओ भी हमारे मैहर के राजनेताओं के दबाव में रहते हैं पार्टियां कोई भी हो नेता जी की शह हमेशा बनी रहती है । चौथा उदाहरण खनन का आज मैहर में खनन जगह जगह चल रहा है लीज एक एकड़ की है खनन पाच एकड़ में खनन माफिया मैहर की धरा को छलनी करते जा रहे सभी खनन माफिया कोई ना कोई पार्टी से जुड़े हैं कुछ माफिया तो बिना लीज लिए हुए मैहर की धरती को खोखला किए जा रहे है जिसके तार राजनेताओं के सहयोग वा आशीर्वाद से फलफूल रहे है। पाचवा उदाहरण पत्थर पीसने वाले क्रेशर का मैहर तहसील के अंतर्गत स्टोन क्रेशर प्लांट की भरमार है यहां तक कि हमारे मैहर खनिज इंस्पेक्टर महोदय जी को खुद पता नहीं है मैहर तहसील के अन्तर्गत कितनी स्टोन क्रेशर संचालित है उसमे से कितनी वैध है और कितनी अवैध ना जांच ना कोई कारवाई सिर्फ लिफाफा लाओ व्यापार चलाओ की स्कीम चल रही है वहीं नेता जी के सहयोगी तो बिना रोक टोक नेता जी के दम पर क्रेशर प्लांट चला रहे है कोई तो वन विभाग के जमीन में ही क्रेशर प्लांट डालकर वन विभाग की ही जमीन से अवैध पत्थर निकाल कर अवैध क्रेशर में पीस कर मोटा पैसा कमा रहे है लिफाफा नेता जी के पास हाजिर रहता है साथ ही खनिज अधिकारी वा खनिज इंस्पेक्टर को भी समय समय पर प्राप्त हो जाता है ना ही किसी क्रेशर की जांच होती है कि आपने कितने घनमीटर पत्थर पिसा है आपके पास कितना स्टॉक है आपने कितना गिट्टी बेचा है कभी कोई टीम खनिज अधिकारियो की औचक दौड़ा नहीं होता अगर चेकिंग में आते भी है तो अधिकारियो के आने के पहले ही क्रेशर संचालकों के पास फोन अा जाता है तो क्रेशर संचालक सतर्क हो कर रिकार्ड लापता कर लेते है और कुछ क्रेशर संचालकों के प्लांटों में अधिकारियो के जाने तक की हिम्मत भी नहीं होती है क्योंकि या तो वो क्रेशर किसी नेता जी की है या फिर कुख्यात अपराधी की है या फिर नेता जी के चमचे की है। छट्वा उदहारण मदपान यानी दारू का मैहर तहसील के अन्तर्गत शायद ही ऐसा कोई गाव बचा होगा जहा दारू नहीं मिलती है उसका कारण प्रशासन नहीं बल्कि गांव के ही लोग है जो कि दारू बिकने ही नहीं देते अन्यथा प्रशासन का वस चले तो प्रशासन खुद अपना एक बंदा बिठाकर दारू बेचने लगे पर मजबूरी के कारण वह दारू मुक्त्त गांव बना हुआ है आज मैहर तहसील के करीब 99 प्रतिसत गावो में खुला दारू बेची जाती हैं उसमे भी हमारे नेता जी मूक बने रहते हैं गांधी जी के तीन बी तरह की हमारी वोट खराब ना हो चुनाव के समय यही लोग तो दारू पहुंचाते हैं जिससे हमारा वोट बैंक प्लस होता है और प्रशासन खुद जानके अनजान बनी रहती है बल्कि खुद सपोट भी देती हैं आज जितना दूध हमारे पूरे मैहर तहसील में नहीं बिकता होगा उससे कई गुना ज्यादा दारू पूरे मैहर तहसील के अन्तर्गत प्रतिदिन बिकती हैं आए दिन सोसल मीडिया प्रिंट मीडिया आवाज़ उठाते है पर प्रशासनिक अधिकारी मौन रहते है नेता जी तो कहते है हमे सुनाई नहीं देता न्यूज़ पेपरों में दिखाई ही नहीं देता इसका सीधा मतलब साफ हो जाता है कही ना कहीं नेता जी का भी हिस्सा पक्का होगा आज हमारा मैहर शहर वा मैहर तहसील के ज्यादातर गांव के परिवार दारू के कारण प्रताड़ित है पर हम अपने मैहर तहसील का भाग्य कहे या दुर्भाग्य की मैहर के चारो तरफ करेपसन भारस्टाचर दिन दुगना रत चौगना बड़ता जा रहा है जिसमें प्रशासन की अहम भूमिका पाई जाती है पहले तो चोरी छुपे दारू की सप्लाई की जाती थीं परन्तु आब तो दारू ठेकेदार के कर्मचारी ही गांव गाव दारू सप्लाई प्रतिदिन टाइम टू टाइम सप्लाई पहुंचाई जाती है वो भी थाने के सामने से निकलते है । सबसे ज्यादा सोचने की बात अगर कुछ है तो वो है मैहर का विकाश ऐसा कौन सा नेता जी हमारे मैहर के अन्दर इन कुरीतियों को दूर कर सकते हैं आज हमारा मैहर वा मैहर की आमजनता कही ना कही खूब पिस रही है और हमारे नेता जी रोज आए दिन पार्टियां बदलते रहते है ना ही हमारे वरिष्ठ नेता जी लोगो की कोई विचार धारा है ना ही सोच सिर्फ स्वार्थ वो भी खुद का मैहर नेता जी का एक ही नारा सबका साथ खुद का विकास और जनता को इस तरह समझाते है कि इनके अलावा कोई नहीं ये ही हमारे मैहर का दुर्भाग्य जोरो पर है मै नेता जी से एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि अभी भी वक्त है बचा लीजिए अपने मैहर को छोड़ दीजिए खुद का स्वार्थ नहीं चाहिए हराम की कमाई अच्छा काम हो हर आदमी खुश रहे भारस्ताचार मुक्त हो हमारा मैहर छेत्र मै कोई नेता नहीं हूं ना ही मुझे नेता बनना है परन्तु मैहर का विकास हो जनता का विनास ना हो जय हिन्द जय भारत।



