मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

खटाई में पड़ी मां नर्मदा में सौ किमी की वाटर सफारी की योजना

एमपी टूरिज्म ने अधोसंरचना में किये कई लाख रूपये खर्च, पर्यटन का नहीं मिल रहा फायदा
मंडला।
प्रकृति ने म.प्र. के मंडला जिले को खूब नवाजा है। ढ़ेर सारे ऐसे प्राकृतिक स्थल हैं जिन्हें विकसित और संरक्षित करने की आवश्यकता है लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिले में प्राकृतिक स्थल, धार्मिक, राष्ट्रीय व सामाजिक महत्व के स्थल के अलावा पुरातात्विक स्थल भी मौजूद हैं जो सिर्फ विकास की बाट जोह रहे हैं इन्हें कब विकसित किया जायेगा यह चर्चा का विषय है। मंडला जिले में मां नर्मदा के तट में कई ऐसे स्थल हैं जिन्हें विकसित करने की आवश्यकता है। मप्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करीब चार साल पहले नर्मदा नदी में बरगी बांध से लेकर मंडला तक करीब 100 किलोमीटर वाटर सफारी का प्लान खटाई में पड़ गया है। मप्र पर्यटन विकास निगम के ईको सर्किट प्लान सिर्फ अधोसंरचना के कार्य कराकर सिमट गया है। वाटर सफारी शुरू नहीं होने से पर्यटक नर्मदा किनारे अलौकिक सुंदरता को नहीं निहार पा रहे हैं। वाटर सफारी शुरू होने से जिले को भी फायदा होता, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कान्हा नेशनल पार्क सौन्दर्य की नदी मां नर्मदा के तटों में अनेक रमणीक स्थल भी हैं इसके साथ गौंडकालीन राजाओं के महल भी हैं जो पर्यटकों को रिझाने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन पर्यटकों के ठहराव के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई कवायद नहीं की जा रही है यही वजह से है कि 4 साल पहले बरगी से मंडला के बीच वाटर सफारी का आनंद और रोमांच लेने के लिए बनाई गई योजना अभी तक पूरी नहीं हुई है। जानकारों की मानें तो करीब 100 किमी का वाटर सफारी का सफर 6 घंटे में पूरा हुआ जिसमें परिवार या मित्रों के अलावा पर्यटक भी शामिल होते इसके साथ कार्पोरेट मीटिंग, वीकेंड गेदरिंग, पिकनिक जैसे इवेंट भी होते। इसका फायदा मंडला जिले को मिलता और रोजगार के अवसर भी बढ़ते लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। क्रुज के ठहराव के लिए 4 स्टापेज बनाये गये हैं जहां वाटर सफारी के दौरान पहुंचने वाले लोगों के रूकने एवं ठहरने के लिए गेस्ट हाउस व खाने पीने के लिए केंटीन हैं लेकिन पिछले तीन सालों में इनका काम भी पूरा नहीं हो पाया है। अधोसंरचना के प्लेटफार्म एवं वाच टावर भी बनाये गये हैं लेकिन अभी तक पेयजल और बिजली की व्यवस्था नहीं बनाई गई है। चिरईडोंगरी, जिलेहरी घाट, पायली बीजाडांडी में स्टापेज बनाये गये हैं जिन पर ध्यान नहीं दिया रहा है। वर्ष 2017-18 में चिरईडोंगरी एवं जिलेहरी घाट में लाखों रूपये खर्च कर निर्माण कार्य किये गये। चिरईडोंगरी में करीब 70 लाख रूपये से पैरामाइन्ड इंजीनियर गु्रप ने पर्यटकों के बोट से उतरने चढऩे के लिए जे.टी. प्लेटफार्म बैठक व्यवस्था के साथ, खाने-पीने की व्यवस्था बनाई गई है जो अब वीरान पड़े हुए हैं। केंटीन, शुलभ शौचालय और अन्य भवन देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। जिले में कान्हा नेशनल पार्क है जहां पर देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं लेकिन मां नर्मदा के दर्शन और इसके अलौकिक सुंदरता को निहारने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं हैं। यदि वाटर सफारी शुरू होती है तो हर तरह का फायदा होगा जिस पर ध्यान देने की मांग शासन प्रशासन से नागरिकों ने की है।

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