मध्य प्रदेशसिवनी दर्पण

भीमगढ़ बांध बड़ी नहर फूटने पर उच्च अधिकारियों के बेतुकी जबाव

कहा चूहे केकड़ा की बजह से टूटी नहर

सिवनी। जिले के सबसे बड़े भीमगढ़ बांध की नहरों का सुधार अब तक नहीं हो पाया है। इसकी असल वजह नहरों के लाइनिंग का काम नहीं होना। दिसंबर 2018 में सिंचाई विभाग ने भोपाल मुख्यालय के प्रमुख अभियंता को 199 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अब तक इसे स्वीकृति नहीं मिली है। मरम्मत नहीं होने से नहरें कमजोर हो रही है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार नहर मे पानी छोड़े जाने के पहले नहरो की देखरेख की जाती है मगर नहीं हुई जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा

हर साल होता है नुकसान : नहरों की मरम्मत को लेकर किसानों में गुस्सा है। किसान ईश्वरदयाल, रेखलाल मरावी, चंदनसिंह, मोहन सिंह, कोमल प्रसाद और मानकलाल का आरोप है कि समय पर नहरों का मरम्मत नहीं कराया जाता है। नहर में पानी छोड़ते समय सीपेज आना तो नहर में ओवर फ्लो या फिर टूटने की समस्या बनती रहती हैं। बोवनी के बाद पानी की जरूरत होती है लेकिन सीपेज से बड़ा नुकसान हो जाता है।

टूटी नहर की मरम्मत जारी : बांध की आरबीसी नहर समनापुर डोकररांजी के पास फूटने के बाद अब विभागीय अमला सुधार कार्य में लगा हुआ है। एक या दो दिन के भीतर नहर फिर से शुरू करने की बात अधिकारी कह रहे हैं। इधर जिन किसानों के खेतों में नहर का पानी भरा था, उन किसानों ने मुआवजे की मांग की है। राजस्व विभाग इसके लिए सर्वे में लगा हुआ है। प्रारंभिक जांच में 47 हेक्टेयर की फसल प्रभावित होना बताया गया है
डोकररांजी के सरपंच अमित राय ने बताया कि डोकररांजी-समनापुर के बीच स्थित नहर फूटने के कारण गेहूं के खेतों में पानी भर गया जिससे कुछ किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। नहर से पानी का प्रवाह रोककर जेसीबी मशीन से पार खड़ी की जा रही है। फसल नुकसानी की जानकारी लेने पटवारी भी मौके पर पहुंचे थे। क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि नहर में टाइल्स लगी हुई है, जिसमें सुराग होने से पानी समाता गया और मिट्टी का कटाव होने से नहर फूट गई। कहा कि सिंचाई विभाग के मैदानी अमले के द्वारा पानी छोड़े जाने के पूर्व नहर की स्थिति को देखा जाता तो यह घटना नहीं होती।
नहर का पानी रोककर की जा रही मरम्मत

भीमगढ़ के संजय सरोवर बांध से निकली नहर डोकररांजी-समनापुर के बीच दो दिन पूर्व फूटी गई थी, जिसकी मरम्मत जेसीबी मशीन के माध्यम से की जा रही है। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
इनका कहना

कार्यपालन यंत्री केवलारी पी सी महाजन

आरबीसी और एलबीसी नहरों की लाइनिंग के लिए दो साल पहले 199 करोड़ का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया था। फिलहाल विभागीय बजट व जल उपभोक्ता संथा की मदद से मरम्मत का काम कराया जा रहा है।

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