मध्य प्रदेश
ग्वालियर में पत्रकारों की गिरफ्तारी को लेकर जिले में पत्रकारों में रोष

दतिया में दो पत्रकारों के साथ कथित पुलिस मारपीट के बाद ग्वालियर दौरे पर आये सीएम शिवराजसिंह चौहान को अपनी मांग पत्र सौंपने पहुंचे पत्रकारों को गिरफ्तार किये जाने की घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में रोष है और इसी के चलते जहां जिले के पत्रकारों ने मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही किये जाने की मांग की। वहीं कुछ पत्रकार साथियों ने इस घटना के विरोध में रविवार को प्रशासनिक खबरों को न छापकर विरोध दर्ज किया। पत्रकारों का कहना है कि कोरोना जैसी महामारी में अपनी जान दांव पर लगाकर शासन, प्रशासन के कोरोना को लेकर किये जा प्रयासों और आम जनता को कोरोना से बचाव को लेकर जागरूक करने में अपनी महती भूमिका निभा रहे पत्रकारों के साथ यदि ऐसा व्यवहार किया जाता है तो वह निंदनीय है।
पत्रकार समाज का आईना होता है, वह समाज को शासन, प्रशासन से जोड़ने में सेतु का काम करता है, वहीं सरकार की जनकल्याणकारी और हितग्राहीमूलक योजनाओं के प्रसार-प्रचार में अपनी कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करता है, ऐसे में यदि पत्रकारों के साथ दमनात्मक कार्यवाही की जायेगी तो कैसे पत्रकार शासन, प्रशासन का सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि मामला जो भी लेकिन दुर्व्यवहार और मारपीट किया जाना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है और यदि पत्रकारों के खिलाफ कोई मामला सामने आया है तो उसकी राजपत्रित अधिकारियों से नियमानुसार जांच करवाकर यदि अपराध बनता है तो पुलिस उसके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करें और विधिसम्मत कार्यवाही करें लेकिन इसके लिए पत्रकारों के साथ मारपीट किया जाना न केवल अमानवीय है बल्कि मानव अधिकारों के खिलाफ भी है। जिसको लेकर पत्रकारों ने पहले सोशल मीडिया में घटना पर नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद कुछ पत्र समूह ने प्रशासन की खबरों को न छापकर अपना विरोध दर्ज किया।
पत्रकार समाज का आईना होता है, वह समाज को शासन, प्रशासन से जोड़ने में सेतु का काम करता है, वहीं सरकार की जनकल्याणकारी और हितग्राहीमूलक योजनाओं के प्रसार-प्रचार में अपनी कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करता है, ऐसे में यदि पत्रकारों के साथ दमनात्मक कार्यवाही की जायेगी तो कैसे पत्रकार शासन, प्रशासन का सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि मामला जो भी लेकिन दुर्व्यवहार और मारपीट किया जाना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है और यदि पत्रकारों के खिलाफ कोई मामला सामने आया है तो उसकी राजपत्रित अधिकारियों से नियमानुसार जांच करवाकर यदि अपराध बनता है तो पुलिस उसके खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करें और विधिसम्मत कार्यवाही करें लेकिन इसके लिए पत्रकारों के साथ मारपीट किया जाना न केवल अमानवीय है बल्कि मानव अधिकारों के खिलाफ भी है। जिसको लेकर पत्रकारों ने पहले सोशल मीडिया में घटना पर नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद कुछ पत्र समूह ने प्रशासन की खबरों को न छापकर अपना विरोध दर्ज किया।



