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लॉकडाउन में बढ़ते मानसिक तनाव को संभालना अति आवश्यक : प्रो. पर्व परमार

कोरोना का कहर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है और भारत में भी इसका प्रकोप काफी बढ़ा है और इसकी गंभीरता को देखते हुए सरकारों ने लॉकडॉन एवं कोरोना कर्फ्यू लागू कर रखे है और इसके चलते लोग काफी दिनों से अपने घर पर अपने काम एवं रोजगार की चिंता से झूज रहे है , वर्क फ्रॉम होम भी चालू है लेकिन जीवन का थम सा जाना कही न कही एक तनाव की स्तिथि पैदा कर ही देता है और महामारी से बचना भी जरूरी है तो सवाल है कैसे इस तनाव को संतुलित करे ? , इस तनाव को संतुलित रखने के लिए सबसे पहले जरूरी है की पेशेंस को अपनाना । हम यह देख रहे है की तनाव सिर्फ हमको है जबकि यह तनाव पूरे विश्व को है और धैर्य से बुरे से बुरा वक्त भी कट जाता है , हम जानते है की शब्द किसी की आर्थिक जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते पर “जान है तो जहान है ” की कहावत को यथार्थ करना आज के समय की जरूरत है , कृषि प्रधान देश मे खाने की किल्लत नही है, हां दवा , ऑक्सीजन और इंजेक्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है लेकिन वह कमी भी पूरी होगी जब सरकार एक जुट होकर अपना काम ठीक से करेगी , राष्ट्रीय आपदा का समय है और सच्ची राष्ट्रीयता तभी दिखेगी जब वे लोग आगे आएंगे जो अपने समुद्र से कुछ पानी उनको देंगे जिनके पास पीने को पानी नहीं है कहने का अर्थ है जिनके पास बहुत है वो उनकी मदद करे जिनके पास कुछ नहीं है , किसी की मदद करना भी तनाव की मात्रा को कम करने मैं मददगार साबित होगी , परिवार की भी एक अहम भूमिका है लेकिन वर्चुअली भी अपने मित्रो से दो शब्द बात आपके तनाव को कम करने में सार्थक है , एक विशेष सूत्र भी है और वह है आत्म चिंतन यह वक्त एक आत्म चिंतन का भी है एक ऐसा चिंतन जिसमे हम अपनी सेहत सुधार सकते है , युवा अपने करियर के बारे मैं प्लान कर सकते है और सबसे अच्छी बात की अध्यात्म की ओर एक विशेष कदम बढ़ा सकते है अध्यात्म की समझ एक व्यक्तित्व मैं निखार का काम भी करती है जिसमे मेडिटेशन का बहुत महत्व है और अंत में अगर हम देखे तो लॉक डाउन एक अवसर भी हो सकता है एक राष्ट्रीय सेवा का , एक अच्छे चिंतन का , एक अच्छी सेहत बनाने का , अपने धैर्य को पहचानने का और अपने परिवार के और करीब आने का और यदि हम इन सभी बातों को आत्मसात करते है तो बेशक हम एक तनाव मुक्त समय बिता सकते है और एक नई ऊर्जा के साथ दोबारा शुरुवात कर सकते है एक सुनहरे भविष्य की ओर और जी सकते है एक ऐसा सकारात्मक जीवन जिसकी कल्पना हम हर दिन किया करते है ।



