नरसिंहपुर दर्पणमध्य प्रदेश
कोरोना काल में सीमांकन व उसमें भी कोताही करने से नही चूके आरआई व पटवारी अवैध

नरसिंहपुर। आम जनता में सबसे ज्यादा विवाद राजस्व विभाग में मनमानी व भ्रष्टाचार के कारण होते हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण मंगलवार को जनपद पंचायत करेली अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जौंहरिया के मौजामें देखने को मिला। पहला तो ये कि जब कलेक्टर द्वारा लाॅकडाॅऊन लगाया गया है। कोर्ट कचहरी के समस्त कार्य स्थगत किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं व अतिआवश्यक कार्य के अलावा लोगों को घरों से बाहर निकलने पर पूर्ण पाबंदी लगी हुई है तब ऐंसी विकट परिस्थिति में जिला कलेक्टर के साथ साथ भारत ,प्रदेश सरकार के आदेशों की अवहेलना करते हुए इस मौजा के आरआई व हल्का पटवारी के द्वारा एक रकवा का सीमांकन के लिए आसपास के 7 खाता धारियों को भी ग्राम कोटवार के माध्यम से नोटिस देकर वहां पहुंचने के लिए बुलावा देकर सीमांकन के लिए 25मई मंगलवार को दोपहर में पहुंच गए। जिससे वहां पर बुलाए गए खाताधारकों सहित अन्य ग्रामीण भी बड़ी संख्या में जमे रहे। नोटिस दिए गए खातेदारों में एक खाते दार ऐंसा भी है जिसका पति कोरोना से उसकी मौत हुए एक माह भी नही बीता है और कोरोना से मृतक का छोटा भाई अभी हाल ही में कोरोना पाॅजिटिव होने पर इलाज से ठीक होकर घर आया है। जिनमें से अधिकांश तो बिना मास्क लगाए ही शोशल डिस्टकेशन की अवहेलना करते हुए l घंटो चले सीमांकन में मौजूद रहे। इस प्रकार से कोरोना प्रोटोकाॅल के नियमों का उल्लंघन आरआई व हल्का पटवारी के द्वारा जानबूझकर किया गया। जबकि लगभग चार घंटो तक चला यह सीमांकन यह कहते हुए टाल दिया गया कि यहां पर चाॅदे-मुनारे राजस्व रिकार्ड के अनुसार अपनी सही जगह पर मौजूद नही होने के कारण इनका सही से मिलान नही हो पा रहा है। जिससे यह सीमांकन अब आगे भविष्य में डिजिटल तकनीक के माध्यम से एक्पर्ट द्वारा कराया जावेगा। इसके साथ ही राजस्व निरीक्षक जगतसिंह ठाकुर एवं हल्का पटवारी कमलेश तिवारी द्वारा मौंके पर मौजूद मण्डी द्वारा वाउंड्रीवाल के वाहर छोड़े गए ख.नं 32 की जमीन को जबरन अतिक्रमण होने को लेकर ग्रामीण की निजी भूमि का रकवा बताया जा रहा था जिसका विरोध करने पर आरआई जगतसिंह भड़क उठे। ग्रामवासी रमेश उर्फ रामजी पटैल ने बताया कि ग्रामीण दुलीचंद हीरालाल द्वारा पूर्व में मण्डी की भूमि ख.नं. 32 रकवा 0.077हे. के कुछ भाग पर जबरन कब्जा करते हुए शटर वाली दुकान बना रखी है जहां से दुकान एवं गोदाम सहित रहवास बना लिया गया है। जबकि इसी मंडी के रकवा पर शासकीय प्राथमिक स्कूल भी बना हुआ है तब ग्रामीण रामजी पटैल के इस तर्क को सही माना जा सकता हैं कि जब खनं 32 पर स्कूल बना हुआ है उसी की सीधाई में हीरालाल द्वारा मकान दुकान व गोदाम बना लिए हैं जबकि ख.नं. 32 के ही कुछ हिस्से पर हीरालाल के भाई दुलीचंद द्वारा भी कब्जा कर मकान व गोदाम बना लिए गए हैं। उसे बचाऐ जाने के लिए आरआई पटवारी द्वारा भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। जिसका विरोध करने पर वे भड़क उठे और पंचनामा बनाते हुए सीमांकन को रद्द कर दिया गया। हीरालाल के द्वारा मण्डी एवं शासकीय पट्टाधारियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा एवं खरीद-फरोख्त आदि की जाती है। इसके विरोध में शिकायत करने पर यह सेवा निर्वित सैनिक की धमकी देकर ग्रामीणों को जबरन दबाव बनाकर परेशान करता रहता है। ग्रामीण चाहते हैं कि यदि हीरालाल या अन्य के द्वारा मण्डी की भूमि या अन्य शासकीय पट्टेदार की भूमियों पर जबरन कब्जा कर रखा है या अवैध रूप से खरीद-फरोख्त की गई हैं तो इस पर शासन के नियमानुसार कार्यवाही होना चाहिए। इस संबंध में तहसीलदार करेली नितिन राय से वात कही गई तो उन्होंने कहा कि अभी कोरोना महामारी के कारण लाॅकडाॅउन जारी है सीमांकन 30 मई के वाद होना शुरू हो सकते हैं। यदि सीमांकन किया गया है और इस दौरान भीड़ एकत्रित हुई होगी तो गलत है। मै जानकारी लेता हूॅ, विधिवत कार्यवाही की जावेगी।



