स्वच्छ भारत मिशन की जमकर खुल्लम खुला उड़ रही है धज्जियां

कटनी। कैमोरदर्पण प्रधानमंत्री पूरे देश में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों और गांवों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं । वही कुछ साल पहले नगर परिषद कैमोर जीएफसी में राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त की उसकी हालत इस प्रकार है। लेकिन प्रधानमंत्री के मिशन को ठेकेदार दिखा रहा है ठेंगा, हर वार्ड में लगा है गंदगी का अंबार, सड़कों पर गंदगी फैली है। लोगों को परेशानी हो रही है।और
नगर परिषद कैमोर ने सफाई व्यवस्था को दे रखा है एमएसडब्ल्यू मैनेजमेंट प्राइवेट कंपनी को अनुबंधन के अनुसार शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना, तो डोर टू डोर का कचरा संग्रहण करके ट्रांसफर स्टेशन में एकत्रित किया जाता है। गाड़ी में गीला कचरा और सूखा कचरा को अलग-अलग लेने की प्रक्रिया होती है ।लेकिन ठेकेदार अपनी मनमानी से मिक्स कचरे को और नालीयो निकला हुआ कचरा उठाकर ले जाता है बिना त्रिपाल डाले आबादी क्षेत्र के साथ-साथ मार्केट से होते हुए गाड़ियां निकल जाती हैं । जिससे संक्रमण बीमारी फैलने का डर बना रहता है । सरकार के द्वारा करोड़ों रुपया का खर्च करके ट्रांसफर स्टेशन में गीला कचरा सूखा कचरा अलग रखने की व्यवस्था अलग-अलग होती है । लेकिन संपूर्ण कचरे को खुले में फेंक दिया जाता है कई महीनों के बाद खुले में पड़े हुए कचरे को जेसीबी के माध्यम से उठाकर कंटेनर मैं डाल कर ले जाते हैं मिक्स कचरे को एक साथ एकत्रित किया जाता है यहां पर एक चौकीदार के लिए एक कक्ष भी बनाया गया। लेकिन इस कक्ष में न तो लाइट न तो पीने योग्य पानी की व्यवस्था जिस कारण से नियुक्त चौकीदार अपनी रोजी-रोटी के लिए इन सड़े गले कचरो के बीच ही रहकर खाना-पीना के साथ ही थोड़ी देर आराम भी करता है लेकिन हालात और भी खराब है इस ट्रांसफर स्टेशन चारों तरफ स्वच्छ वातावरण के लिए हरे भरे पौधों भी लगाए जाएंगे लेकिन आज दिनांक तक इस परिसर में किसी भी प्रकार का वृक्षारोपण नहीं किया गया किसी भी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं ट्रांसफर स्टेशन बनने के बाद भी आज दिनांक तक कचरा गाड़ी नगर पंचायत के आसपास खड़ी नजर आ रही हैं गाड़ियों की हालत इतनी खराब हो गई।कि एमएसडब्ल्यू कंपनी के कर्मचारी ने हमें यह बताया की ना तो हमारा मेडिकल होता और ना ही किसी प्रकार की कोई सुविधा हमें उपलब्ध कराई जाती है ठेकेदार की मनमानी यहां तक सीमित नहीं हुई ।आइए हम उस ट्रांसफर स्टेशन के चौकीदार की ओर लेकर चलते हैं जिन्होंने संपूर्ण जानकारी मीडिया को बताया यही हाल नगर पंचायत बिजयरावघगढ़ क्षेत्र का है जहां स्थापित किए गए ट्रांसफर स्टेशन शेड का और ही बुरा हाल है। यहा किसी भी प्रकार की कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है इस शेड मे ना तो चौकीदार, ना बिजली, न ही पीने योग्य पानी, न ही ही स्वच्छ पर्यावरण की व्यवस्था, नगर परिषद को हर महीने लाखों रुपए का भुगतान करने के लिए बिल दे रही है यही है स्वच्छ भारत मिशन की कहानी ठेकेदार की मनमानी ।



