मध्य प्रदेशसतना दर्पण

नगरपालिका मैहर का नाकारापन

अतिक्रमण से कराह रहा शहर

डर्टी पॉलिटिक्स ने विधायक की उम्दा सोच पर लगाया ग्रहण

मैहर – इनदिनो हर क्षेत्र में मैहर नगरपालिका की स्थित बद से बदतर होती जा रही है लोग दबी जुबान अब यह कहने लगे है कि मैहर नगरपालिका के इतिहास में सबसे फिसड्डी अध्यक्ष गीता संतोष सोनी साबित होने जा रही है। पूरा शहर चाहे बात घंटाघर की हो स्टेट बैंक चौराहे की हो कटरा बाजार की हो रीवा रोड ओवर ब्रिज की हो इस कदर अतिक्रमणकारियों ने अपनी चपेट में ले रखा है कि आम आदमी का जीना दुश्वार हो चुका है लोगो को यहां से निकलने में सोचना पड़ता है सड़क जहां आम आदमी के आवागमन के लिए है वहां ठेला वालो का कब्जा है घंटाघर इतना व्यस्त चौराहा चारो तरफ अतिक्रमणकारियों का आतंक लोग खरीददारी करने जाते है तो अपनी गाड़ी कहा खड़ी करे सोचना पड़ता है केवल ठेला वालो की भरमार। लेकिन ये बात न तो यहां की मौजूदा सीएमओ को दिखाई देती न अध्यक्ष को दिखाई देवी और न संबंधित पार्षदों को दिखाई देती सभी के सभी सिर्फ और सिर्फ मलाई अरछाने में लगे है। जनहित और जनता के हितों से इनका अब कोई वास्ता नहीं रह गया। लोगो ने बड़ी उम्मीद से शीतल नितिन ताम्रकार को पार्षद चुना फिर उपाध्यक्ष भी बने लेकिन इसके बाद भी इनके हाथ पांव बंधे है। साहब जनता ने चुना है तो जनहित के लिए लड़िए जनता के हितों की रक्षा करिए क्योंकि जरूरी नहीं कि कल भी आपका ही होगा। घंटाघर चंडीमाता स्टेट बैंक चौराहा कटरा बाजार की तो बात ही छोड़िए जब से नई सीएमओ साहिबा आई है इनके चरण मैहर की धरती में पड़े है मैहर ओवर ब्रिज का फुटपाथ सब्जी मंडी बन गया। वर्तमान समय में शहर की स्थितियां बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है जिसके लिए अध्यक्ष उपाध्यक्ष और सीएमओ सीधे तौर पर जिम्मेवार है। विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने शहर को व्यवस्थित करने के लिए उम्दा प्लान तैयार किया था व्यवस्थित करने के संकल्प के साथ एक अच्छी सोच के साथ शहर को अतिक्रमण मुक्त करने साथ ही अतिक्रमणकारियों को भी व्यवस्थित करने की कार्ययोजना तैयार की थी साथ ही उसमें कोई पहल भी शुरू की थी लेकिन डर्टी पॉलिटिक्स ने उनकी सोच पर ग्रहण लगा शहर को नर्क बना दिया। आज शहर के लोग इस बात को कहने लगे है कि विधायक की पहल सराहनीय थी जिसका समर्थन होना चाहिए था। सीएमओ साहिबा अध्यक्षा महोदया ये माई का धाम है यहां कुछ अच्छा करने की जरूरत है नहीं तो याद रखिए जिस दिन माई की निगाह तिरछी हुई तो वहां पहुंचने में समय नहीं लगेगा जहां से चले थे।

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