क्या लकडाउन पूरी ज़िन्दगी रोना भी सिखाएगा?

अब मैने झाड़ू लगाना सीख लिया |पोछा लगाना सीख लिया |रोटी बनाना सीख लिया |घर में अकेले रहना सीख लिया |अब तो अकेले रोना भी सीख लिया पर मै ज़िन्दगी भर रोना नहीं चाहता |क्या लॉकडाउन पूरी ज़िन्दगी रोना भी सिखाएगा |
बच्चे की दर्द भरी भावनाएं सुनकर माँ आहत हो गयी |पास आकर बच्चे के सर पर हाथ फेरते हुए कहा -बेटा क्या बात है? क्यों ऐसे बोल रहे हो?और ज़िन्दगी भर क्यों रोओगे ?बेटे ने आँखों से आँसू छलकाते हुए कहा माँ एक ओर सरकार कोरोना महामारी के कारण स्कूल नहीं खोल रही और वहीं दूसरी ओर आपको और पापा को बाहर जाने की इज़जात दे रही है |सबके माँ पापा बाहर जायेंगे तो भीड़ होगी, भीड़ होगी तो कोरोना फैलेगा, कोरोना फैलेगा तो आप और पापा बीमार होंगे |ज़ब आप दोनों बीमार होंगे तो अस्पताल जायेंगे |ज़ब अस्पताल जायेंगे तो ऑक्सीजन नहीं मिलेगा ज़ब ऑक्सीजन नहीं मिलेगा तो आप और पापा तो भगवान के पास चले जायेंगे |
तब हम अकेले रह जायेंगे |माँ हम अकेले कैसे रहेंगे, बहुत डर लगेगा | माँ भगवान से रिक्वेस्ट करके मुझे भी बुला लेना| ठीक है माँ |
अब मासूम बच्चे को माँ कैसे समझा पाती कि वो क्यों और किसलिए बाहर जाती है
कल्पना भदौरिया “स्वप्निल ”
लखनऊ
उत्तरप्रदेश
7007821513



