समरसता कजलियां महोत्सव हेतु 400 पात्रों का हुआ वितरण

जबलपुर दर्पण। मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति श्री पीके मिश्रा, मुख्य वक्ता सांची बौद्ध विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अलकेश चतुर्वेदी, समरसता सेवा संगठन अध्यक्ष श्री संदीप जैन, सचिव श्री उज्ज्वल पचौरी की गरिमामय उपस्थिति में सरदार बल्लभ भाई पटेल (गुजराती मंडल) सिविक सेंटर के सभागार में आयोजित किया गया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ अलकेश चतुर्वेदी ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा भारत मे वर्ण व्यवस्था रही है हमारे वेदों में भी वर्ण व्यवस्था का उल्लेख किया गया है जाति समाज का उल्लेख कही नही है।उन्होंने बताया 1927 में साइमन कमीशन भारत मे आया और उन्होंने ही एससी, एसटी शब्द दिया और आज 100 वर्ष भी नही हुए और आज हमारा समाज अगड़े पिछड़े में बंट गया। हमे बाटने के लिए वर्णों को जाति वर्ग में बांट दिया गया।उन्होंने कहा 21 अगस्त को संयोग से विश्व उद्यमिता दिवस भी मानते है और दुनिया मे भारत में ही सबसे ज्यादा एंटरप्रिन्योर है यह शब्द आज प्रचलित हो गया पर हमारे देश मे एंटरप्रेन्योरशिप वर्षों से रही है जिनमे छोटे छोटे व्यापार होते थे किंतु धीरे धीरे पश्चिमी संस्कृति की वजह से मॉल कल्चर फलने फूलने लगा और छोटे छोटे उद्योग व्यापार पर इसका असर होने लगा।
उन्होंने कहा भारत ऐसा देश है जहाँ प्रकृति की पूजा की जाती है, हम नदी, जल, पहाड़, वायु, पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र, पेड़ पौधे, पशु पक्षी को पूजते है और हम अपने त्यौहार भी प्रकृति की पूजा करते हुए मानते है। आज भारत की परंपरा को पश्चिम के देश भी मान रहे है और वे भी प्रकृति से जुड़ने का प्रयास कर रहे है। हम आज चौरसिया दिवस और नाग पंचमी के अवसर पर एकत्र हुए है और आज ही कजलियों के त्योहार की शुरुआत भी संगठन द्वारा की जा रही है ये सारे त्यौहार प्रकृति और समरसता का प्रतीक है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. श्री पीके मिश्रा ने विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा व्यक्ति परिवार में रहता है और जब बड़ी संख्या में परिवार एकत्र हो जाते है तो उसे हम समाज कहते है और जब एक ही व्यवसाय करने वाले परिवार साथ जुड़े और कालान्तर में वह जातियों से पहचाने जाने लगे उसके बाद देश में आये बाहरी आक्रमणकारियों ने देश को तोड़ने के लिए जाति समाज को बाटने का कार्य किया जिससे ऊंच नीच का भाव पैदा हुआ। इस ऊँच नीच के भाव को दूर करने के लिए समरसता के भाव की जरूरत है और इसी उद्देश्य के साथ जो यह संगठन खड़ा किया गया है उसके लिए वे बधाई के पात्र है।
सेवानिवृत्त प्रो. आरके चौरसिया ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौरसिया दिवस के अवसर पर उनके मुख्य व्यवसाय पान के विषय मे बताते हुए कहा पान में 14 न्यूक्लीयनस और 3 विटामिन मौजूद है। पान में आयुर्वेद की सभी गुण मौजूद है उसे खाने से बीमारियां दूर होती है। किन्तु उद्योगपतियों द्वारा गुटके की संस्कृति आने के बाद लोग पान से दूर होते गए और पाउच वाले गुटके के खाने से बीमारियों से व्यक्ति ग्रसित हुआ है वही पान के व्यवसाय पर भी असर हुआ है।



