समर्थ सदगुरु के अन्न आहार त्याग का 318 वां दिन

जबलपुर दर्पण। माँ नर्मदा ,गौ वंश ,प्रकृति, पर्यावरण के संरक्षण सम्वर्धन के लिए 314 दिनों से अन्न आहार त्यागकर सत्याग्रह कर रहे समर्थ दादा गुरु ने कृष्ण चिंतन श्रीमद्भागवत तत्व चिंतन में कहा-श्रीमद्भागवत परमहंसी गंगा है जो हमें हर स्थिति में जीना सिखाती है यही वो परमहंसी गंगा नर्मदा का पथ है जो कृष्ण राम से मिलाता है भक्ति ज्ञान वैराग्य सन्यास दिलाता है। धर्म का बोध कराता एक आदर्श जीवन की परिकल्पना को साकार करने का सहज महायोग है। वर्तमान समय भीषण आपदाओं संक्रमण से भरा है चारों ओर भयावह स्थिति निर्मित बन रही है ऐसे समय में ध्यान रहे यदि हम सबसे सुरक्षित सबसे अच्छा रहना चाहते है सबसे अच्छा बेहतर करना या बनना चाहते है तो कृष्ण के समीप आये कृष्ण के समीप आना कृष्ण की ओर आना प्रकृति के समीप आना है जो प्रकृति के समीप है वही बेहतर है वही सुरक्षित है हर समस्या का समाधान प्रकृति के पास है आज देश दुनिया की सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम प्रकृति से विमुख हो रहे है प्रकृति का अंधाधुंध दोहन शोषण हो रहा है परिणाम हमारे सामने है प्राकृतिक आपदाओं अनेक संक्रमण महामारियों से हम ग्रसित हो रहे है। अप्राकृतिक साधन संसाधनो से लिप्त हमारा जीवन दम तोड़ रहा है एक आदर्श समर्थ समाज राष्ट्र जीवन की परिकल्पना श्री कृष्ण राम के चरित्र से ही संभव है।



