मण्डला दर्पणमध्य प्रदेश

सिकलसेल ने पढ़ाई पर लगाया ब्रेक, आर्थिक स्थिति भी खराब

आयुष्मान योजना से मिल रहा लाभ, आयुष्मान मित्र ने किया ब्लड डोनेट

मंडला। सिकलसेल एनीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार रोग है। यह बीमारी प्राय: बाल्यावस्था में उत्पन्न होती है। यह बीमारी मुख्यत मलेरिया ग्रस्ति क्षेत्रों में ज्यादा प्रभावी है। इस बीमारी से मंडला जिला भी ग्रस्ति है। जिसमें बच्चों से लेकर बड़ों तक सैकड़ों लोग पीडि़त है। इसी रोग से पीडि़त जिले के ग्राम हिरदेनगर निवासी एक 20 वर्षीय युवती ग्रस्ति है। बीमारी और आर्थिक स्थिति से कमजोर युवती इस लाईलाज बीमारी के कारण अपनी पढ़ाई से वंचित हो गई है। कक्षा आठवीं तक पढ़ी युवती इस बीमारी के कारण आगे नहीं पढ़ सकी। जिसके कारण युवती दुखी है।
जानकारी अनुसार सिकलसेल बीमारी से पीडि़त हिरदेनगर निवासी युवती अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोडऩा पड़ा। कारण है कि इस बीमारी के चलते युवती को बार बार चक्कर आ जाते थे, कभी भी कहीं भी बेहोश हो जाती थी, शरीर में रक्त की कमी के कारण युवती काफी कमजोर हो चुकी है। युवती की माँ ने बताया कि इस यह बीमारी युवती को सात साल की उम्र से है। उसी समय से इसका उपचार जिला चिकित्सालय में कराया जा रहा है। आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण परिजन निजी अस्पताल भी युवती को नहीं ले जा सकते है। करीब 13 साल से युवती को माह में दो बार जिला चिकित्सालय मंडला में ही ए पॉजीटिव ब्लड चढ़ाया जा रहा है।
युवती की माँ गीता डहेरिया ने बताया कि सिकलसेल के उपचार के दौरान आयुष्मान योजना की जानकारी लगी। युवती को ब्लड लगाने अस्पताल में इसे भर्ती कराया गया। जहां जिला चिकित्सालय में पदस्थ आयुष्मान मित्र ने युवती को आयुष्मान योजना में पंजीकृत किया। जिसके बाद गीता की बेटी को आयुष्मान मित्र के सहयोग से रक्त भी समय से मिलने लगा। रक्त की जरूरत पडऩे पर भी इनके माध्यम से ब्लड उपलब्ध कराया गया। जिससे युवती को हर माह ब्लड मिल रहा है।
आयुष्मान मित्र ने किया ब्लड डोनेट :- बता दे कि यदि ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध होता है तो युवती को समय पर रक्त मिल जाता है, यदि ब्लड बैंक में रक्त नहीं मिल पाया तो रक्त के लिए काफी जदोजहद करनी पड़ती है। जिससे युवती की जान पर बन आती है। यहां जिला चिकित्सालय में ईलाजरत युवती के लिए चिकित्सक भी रक्त उपलब्ध कराने मदद करते है। जिससे युवती को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। फिलहाल ब्लड बैंक में ए पॉजीटिव रक्त की कमी बनी हुई है। जिसके कारण युवती को ब्लड नहीं मिल पा रहा था, ऐसे में आयुष्मान कार्यालय में पदस्थ आयुष्मान मित्र सतीश धुर्वे को इसकी जानकारी लगी कि आयुष्मान में पंजीकृत युवती वर्षारानी को ए पॉजीटिव ब्लड नहीं मिल पा रहा है तो, आयुष्मान मित्र सतीश ने युवती के परिजन को परेशान देखते हुए पहली बार रक्तदान किया। सतीश का भी ब्लड गु्रप ए पॉजीटिव था। ब्लड डोनेट के बाद युवती को रक्त चढ़ाया गया।
जेनेटिक बीमारी है सिकल सेल एनीमिया :-सिकल सेल जेनेटिक बीमारी है। सामान्य रूप में शरीर में लाल रक्त कण प्लेट की तरह चपटे और गोल होते हैं। यह रक्त वाहिकाओं में आसानी से आवाजाही कर पाते हैं, लेकिन जीन असामान्य हैं, तो इसके कारण लाल रक्त कण प्लेट की तरह गोल न होकर अर्धचंद्राकार रूप में दिखाई देते हैं। इस वजह से यह रक्त वाहिकाओं में ठीक तरह से आवागमन नहीं कर पाते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इसके कारण मरीज को एनीमिया की समस्या होती है। आदिवासियों में यह रोग तेजी से होता है। सिकल सेल रोग अधिकतर उन इलाकों में ज्यादा होता है, जो अविकसित होते है।

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