विद्युत् दरो की वृद्धि पर होने वाली जन सुनवाई ऑनलाइन की बजाए फिजिकल हो

जबलपुर दर्पण। महाकोशल चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स एण्ड इंण्डस्ट्री ने प्रदेश में प्रस्तावित विद्युत् दरो की वृद्धि का विरोध करते हुए पत्र भेजा है चेम्बर के मानसेवी मंत्री शंकर नाग्देव ने बताया की कोरोना से संबंधित सभी बाध्यताएं म.प्र. शासन द्वारा समाप्त कर दी है वाबजूत ऑनलाइन जन सुनवाई रखने का कोई औचित्य नही है जबकि हाई कोर्ट में भी फिजिकल सुनवाई आरंभ हो गई है। ऑनलाइन सुनवाई में आपत्ति/सुझावकर्ता की आवाज को म्यूट करके उसके अधिकारों का हनन करने का प्रयास किया जाता है जबकि फिजिकल जन सुनवाई में सुझाव /आपत्तिकर्ता अपनी पूरी बात आयोग के समक्ष रखने में अधिक सरलता महसूस करता है। अत: पूर्व की भांति खुली जन सुनवाई जबलपुर के तरंग ऑडिटोरियम में रखी जाए साथ ही यह भी न्याय संगत नही है कि आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम दिनांक 4 मार्च रखी गई है और जन सुनवाई प्रदेश के जबलपुर , भोपाल, और इंदौर में क्रमश: 8, 9 एवं 10 मार्च को रखी गई है इससे ऐसा महसूस होता है कि आयोग विद्युत् दरे बढाने की विद्युत् कंपनियों की याचिकाओ पर जल्द बाजी में रस्म अदाएगी जैसी कार्यवाही कर रहा है जबकि अंतिम दिनांक के बाद आपति/सुझावकर्ताको उसकी आपत्ति पर जवाब मिलता है उसका अध्यन करने के लिए कम से कम कंपनियों का जवाब प्राप्त होने के 7 दिन बाद जन सुनवाई करना ही न्याय पूर्ण होगा और आयोग को भी आपत्ति और जवाब पर विचार के लिए समय मिलेगा जिससे आयोग को भी निष्पक्ष निर्णय करने में सरलता होगी यदि ऐसा नही किया गया तो आयोग का झुकाव विद्युत् कंपनियों की और स्पष्ट दिखेगा,चेम्बर के अध्यक्ष रवि गुप्ता, उपाध्यक्ष राजेश चंडोक, हेमराज अग्रवाल, शंकर नाग्देव, युवराज जैन गढ़ावाल, अखिल मिश्र, अनूप अग्रवाल, अनिल जैन पाली, हेल्प डेस्क प्रभारी प्रदीप बिस्वारी व कार्यालय सचिव हर नारायण सिंह राजपूत ने आयोग से चेम्बर के पत्र पर उचित निर्णय लेकर उपभोगताओं के साथ न्याय करने की मांग की है।



