स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के प्रतिरूपों का भी सम्मान जरूरी

स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गौरवान्वित करने वाला दिवस है। हर भारतीय इस दिन देश की आजादी में अपना योगदान वलिदान देने वाले हर सेनानी को दिल से याद करता है। और हर्षोल्लास के साथ उत्सव मनाता है। गांधी जयंती, गणतंत्र दिवस के बाद यह हमारे दे देश का प्रमुख राष्ट्रीय पर्व है। स्वतंत्रता दिवस हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मिलकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को ध्वजारोहण करके जन गण मन राष्ट्रगान गाकर मनाते है। स्कूल कॉलेजों एवं जिला तहसील के मुख्य समारोह में बच्चों एवं नागरिकों के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रतीक प्लास्टिक एवं कागज के झंडे, स्टीकर, हैंड -बैंड, कैप-टोपी तथा कोविड-19 करोना महामारी के कारण सबसे ज्यादा अब उपयोग किया जाने वाला माक्स इत्यादि उपयोग करने के बाद भूलवश गलती से या जानबूझकर कचड़े के ढेर एव सडकों मैं फेंक देते हैं जो कि गलत है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अपमान है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के प्रतिरूप भी हमारे लिए उतने ही सम्माननीय होते हैं जितना कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा। इनको इस प्रकार से फेंकना हमें लापरवाह तथा देशद्रोही कर सकता है। इसलिए इन राष्ट्र ध्वज प्रतीकों को सावधानीपूर्वक सम्मान के साथ विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करना चाहिए यहां वहां कहीं भी नहीं फेंकना चाहिए।
भारतीय संविधान संहिता हम सभी निजी नागरिकों अपने परिसरों में ध्वज फहराने का अधिकार देता है। परन्तु इस ध्वज को सांप्रदायिक लाभ, पर्दें या वस्त्रों के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। जहाँ तक संभव हो इसे मौसम से प्रभावित हुए बिना सूर्योदय से सूर्यास्त तक राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाना चाहिए।
परंतु देखने में आया है कि कुछ स्थानों पर लोग भूलवश या जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज एवं उनके प्रतिरूपों का आदर – सम्मान नहीं करते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ भारतीय ध्वज आचार संहिता 2002 व राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा-2 के तहत कार्रवाई की जाएगी जिसमें 3 वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान है या फिर दोनों ही हो सकते हैं।



