9 वर्षो से अधिक समय से जमी महिला पुलिस आरक्षक कविता शर्मा: स्थांतरण प्रक्रिया पर उठे सवाल…?

कई का अनेक बार, कई का एक बार भी ट्रांसफर नहीं..?
पाटन नप्र/जबलपुर दर्पण। पाटन एसडीओपी कार्यालय में पदस्य आरक्षक कविता शर्मा लगभग 9 वर्षी से अधिक समय से पाटन थाना एवं पुलिस एसडीओपी कार्यालय में जमी है। अपने पति को पत्रकार बताती है। यह जांच का विषय है..! क्या महिला पुलिस आरक्षक एवं उनके पति द्वारा पत्रकारिता की आड़ में पाटन नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों की जनता एवं अधिकारी,कर्मचारियों को पत्रकारिता की धोस बताकर पैसा ऐठना ही इस दंपति का एक मात्र मकसद है। ऐसे कृत्य से पत्रकारिता जगत एवं पुलिस की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
आखिर पाटन ही क्यों:- महिला आरक्षक कविता शर्मा को पाटन बेहद पसंद है जो पिछले 09 वर्ष से पाटन थाने एवं पाटन एसडीओपी ऑफिस में पोस्टिंग कराकर जमी है। सिर्फ 1 दिन के लिए विजय नगर थाने में आमद देकर पुनः पुलिस एसडीओपी कार्यालय में पोस्टिंग कराकर अंगद के पैर की तरह यही जम गई एवं पाटन में अपने पत्रकार पति के साथ मिलकर गहरी जड़ें जमा ली। यही से पाटन में जमे रहने का सिलसिला शुरू हो गया पोस्टिंग के बाद से ही पाटन क्षेत्र की तासीर से भली भांति परिचित आरक्षक कविता शर्मा ने पाटन क्षेत्र की जनता को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया रिपोर्ट करवाने की मदद के नाम पर, रिपोर्ट पर कार्यवाही के नाम पर वसूली, रेत माफिया, शराब माफिया, सट्टा खिलाने वालो से अवैध वसूली करना, बाहरी ट्रक के एक्सीडेंट होने पर थाने की सेटिंग एवं ट्रक के सुपुर्द नामे के लिए वकील करवाने के नाम पर अवैध रूप से वसूली, पीड़ित ट्रक चालक एवं उनके मालिकों से पैसे की वसूली इनका पेशा बन गया कई बार तो अपने ही पुलिस विभाग के अधिकारियों कर्मचारी को अपने पत्रकार पति की धोस दिखाकर डराने धमकाने का काम किया और किसी ने विरोध किया तो प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया में खबर चलाने की धमकी दे डाली, क्या पुलिस अधीक्षक महिला पुलिस आरक्षक एवं इनके पत्रकार पति की जांच कराएंगे, क्या महिला आरक्षक की जांच कर इनका ट्रांसफर होगा यह एक विचारणीय प्रश्न है।



