सरकारी आवासोँ की दुर्दशा पर जिम्मेदार क्यों है मौन ?

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया गया कि प्रदेश में विभिन्न जिलों, तहसीलों एवं विकासखंडो में 50 से अधिक विभागों के कार्यालय एवं उपकार्यालय हैँ जिनमें लाखों की संख्या में अधिकारी कर्मचारी पदस्थ हैँ।जिनके लिए सरकारी आवास की व्यवस्था की गयी है। अधिकारीयों एवं कर्मचारियों को उनकी अहरता श्रेणी के अनुसार सरकारी आवास में विभिन्न प्रकार के क्वाटर्स, बँगले इत्यादि बनाकर दिए गए है जो प्रावधान में भी है। इन विभिन्न विभागों में पदस्थ अधिकारीयों -कर्मचारियों में से लगभग 30 से 40% ही शासकीय आवास का उपयोग करते है अधिकांश गृह भाड़ा भत्ता लेते हैँ। गृह भाड़ा भत्ता भी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के हिसाब से अलग अलग मिलता है। पी डब्ल्यू डी, पी एच् ई, यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, पुलिस लाइन, रानी अवन्ति बाई जल परियोजना, बरगी हिल्स तथा बरगी नगर इनके अतिरिक्त भी अन्य स्थानों पर सरकारी आवासोँ का निर्माण किया गया था। रख रखाव एवं देख रेख के अभाव में एवं तय समय सीमा बीत जाने के कारण अब ये सरकारी आवास दुर्दशा का शिकार हो गए हैँ। ये जर्ज़र सरकारी भवन कभी भी धाराशयी हो सकते है। संगठन के चंदा सोनी, आशा सिसोदिया, पुष्पा रघुवंशी, भास्कर गुप्ता,बैजनाथ यादव,अफ़रोज़ खान,ऋषि पाठक,अशोक उपाध्याय,जी आर झारिया, चंद्रभान साहू, विशाल सिंह आदि ने मांग की है।



