जबलपुर से दहेज मुक्त विवाह हुए संपन्न बैतूल आश्रम में

जबलपुर दर्पण। संत रामपाल जी महराज का नाम दुनिया के सबसे बड़े समाज सुधारक संत के रूप में यों ही नहीं लिया जाता। संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में विशाल भंडारे आए दिन होते ही रहते हैं। और इन भंडारों में होते हैं रक्तदान, देहदान, दहेजमुक्त विवाह। संत रामपाल जी महराज के समागमों का रंग जबलपुर संभाग पर भी चढ़ा है। इस बार हाल ही में संत गरीबदास जी महाराज के बोध दिवस पर तीन दिवसीय अखंड पाठ और विशाल भंडारे का आयोजन दिनांक 2, 3, 4 मार्च को किया गया था। इस आयोजित तीन दिवसीय अखंड पाठ और विशाल भंडारे के समारोह में 51 जोड़े दहेजमुक्त विवाह बंधन में बंधे जिनमें से तीन जोड़े जबलपुर संभाग से हैं। लीला पुत्री श्यामलाल, ग्राम रमपुरी, तहलील शहपुरा, जिला पन्ना से; डॉक्टर दिलेश्वर पुत्र नवल किशोर, बांधवगढ़ जिला उमरिया से; अरुण कुमार पुत्र दालचंद कैमोरी तहसील पाटन, जिला जबलपुर से तथा रवींद्र पुत्र कृष्णकुमार स्लीमनाबाद, जिला कटनी का विवाह भी इसी समागम के अवसर पर बैतूल (उड़दन) से संपन्न हुआ।
संत रामपाल जी महराज ने ऐसे विवाहों के माध्यम से समाज में एक नई और सफल पहल की है। ऐसे विवाह समाज के लिए अनुकरणीय हैं और अत्यंत सराहनीय हैं। संत रामपाल जी महराज ने अपने तत्वज्ञान के माध्यम से ऐसे विवाह माता आदिशक्ति के तीन बेटों ब्रह्मा, विष्णु और शिव के बताए हैं। और उसी पद्धति से जब विश्व के सभी देवी देवताओं की स्तुति के साथ विवाह किए जाते हैं तो वे सर्वोत्तम कोटि के विवाह होते हैं। संत रामपाल जी महाराज के इस ज्ञान से जो बदलाव समाज में आया है वह अब तक कोई कानून भी नहीं ला सका था। निश्चित रूप से दहेज हत्या और भ्रूण हत्या में ये पहल गिरावट ला रही है। लाखों बेटियां सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रही हैं। संत रामपाल जी महराज ने समाज सुधार की एक विशेष लहर पूरे देश में प्रवाहित कर दी है। गौरतलब है कि संत रामपाल जी महराज के शिष्य केवल भारत में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के अलग अलग देशों से भी हैं। संत रामपाल जी महाराज के द्वारा किए गए इन सामाजिक कार्यों और उनके अनमोल आध्यात्मिक ज्ञान जोकि शास्त्रों के आधार पर हैं, इनका समाज सदैव ऋणी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए प्ले स्टोर से संत रामपाल जी महाराज एप निशुल्क डाउनलोड करके जानकारी उठाई जा सकती है एवं मुफ्त किताब भी ऑर्डर की जा सकती हैं।



