संत रामपाल भगवान का समागम संपन हुआ सतलोक आश्रम बैतूल में

जबलपुर दर्पण।मध्यप्रदेश के जिला बैतूल में स्थित संत रामपाल जी महाराज जी के सतलोक आश्रम उड़दन में तीन दिवसीय भव्य समागम का आयोजन किया गया था जिसमे लाखों लोग आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराए बताया जा रहा है। कि यह समागम संत गरीबदास जी महाराज जी के बोध दिवस के उपलक्ष्य में मनाया गया जिसमे विशाल आध्यात्मिक सत्संग,विशाल भंडारा, अमर ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ, दहेज मुक्त विवाह का आयोजन किया गया।
आज दिनांक 03 मार्च को 51 जोड़ो का विवाह बिना दान दहेज के सादगी पूर्ण तरीके से मात्र 17 मिनिट में संपन्न हुआ साथ ही श्रद्धालु रक्तदान देकर जनसेवा भी किए।
यह कार्यक्रम जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के नशामुक्त, दहेज मुक्त भारत अभियान के तहत हुआ जिसमे प्रतिदिन लाखों लोग आ रहे थे और प्रसाद के रूप में शुद्ध देशी घी से बना भंडारा सब्जी, पूड़ी, दाल चावल व बूंदी प्रसादी ग्रहण कर रहे थे।सबसे खास बात यह थी कि इतनी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बाद भी किसी प्रकार की कोई अव्यवस्था देखने को नहीं मिल मिली बिल्कुल शांतिपूर्ण समागम चला हजारों की संख्या में व्हीकल आए जिसके लिए पार्किंग की समुचित व्यवस्था की गई थी ।आज के दिन सतलोक आश्रम में कही भी जगह नहीं बची हुई है,चारो तरफ गुरुभक्ति में मस्त संगत ही नजर आ रही है, भंडारे के लिए ऐसी व्यवस्था है कि एक बार में 20-25 हजार लोग एक साथ भंडारा प्राप्त कर रहे है और ये सिलसिला बिना रुके लगातार चल रहा है। संगत के बैठने का पांडाल भी ए खचाखच भरा हुआ था। गरीबदास जी महाराज द्वारा रचित अमरवाणी के अखंड पाठ की वाणिया आत्मा को शांति प्रदान कर रही थी,आश्रम में संत रामपाल जी महाराज जी का सिंहासन पर स्थित स्वरूप ऐसा लगता है मानो संत जी स्वयं वहा विराजमान हो।
समागम में लाखो की संख्या में लोग आ रहे है और जा रहे है जिनकी व्यवस्था के लिए 10 हजार सेवादार लगातार सेवा में लगे हुए है, इस विशाल समागम में संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों सहित भारी संख्या में जगत के लोगों ने आकर भंडारा प्राप्त किया ।संत रामपाल जी महाराज जी के 2000 अनुयाई ने देह दान के संकल्प फ्रॉम भरे गए और 300 लोगो ने किया रक्त दान किया संत रामपाल जी के ज्ञान से प्रभावित होकर 600 लोगो ने नाम दीक्षा लिए
समागम को दुल्हन की तरह सजाया गया सबसे बड़ी बात यह देखने को मिली हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी धर्म के लोग भंडारा प्रसाद पाए और संत जी की जय जयकार किए 60 एकड़ का आश्रम संगत में भरा हुआ था।



