नगर भ्रमण पर निकलेंगे भक्तों को देने आशीर्वाद राजाधिराज भगवान श्री गुप्तेश्वर महादेव

जबलपुर दर्पण। देव उठनी एकादशी तक समस्त सृष्टि का कार्यभार देवाधिदेव महादेव भगवान शंकर के हाथों में होता, क्योंकि सभी देवगण इस समय विश्राम में होते हैं, तब ! जब समस्त सृष्टि का कार्यभार देवाधिदेव महादेव के हाथों में होता है तब भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की चिंता करते हुए सुख दुख की खोज खबर लेने के लिये स्वयं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से नगर भ्रमण के लिये निकलते ही है और अपने भक्तों को सुख शांति समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, उज्जैनी के राजा भगवान महाकाल की सवारी यात्रा पारंपरिक रूप से इसका प्रमाण है।
इसी क्रम में संस्कारधानी के राजा (रामेश्वर महादेव ज्योर्तिलिंग के उपलिंग) भगवान श्री गुप्तेश्वर महादेव जी की शाही सवारी यात्रा उज्जैन महाकाल की तर्ज पर बड़े ही धूमधाम एवं शौर्य के साथ संतों की अगुआई में निकाली जाती ह. विगत वर्षों से यह शाही यात्रा संस्कारधानी की पहचान बन चुकी है।
स्वयंभू सिद्धपीठ हैं भगवान श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर
अति प्राचीन स्वयं-भू सिद्धपीठ भगवान श्री गुप्तेश्वर महादेव मंदिर संस्कारधानी का गौरव है। संस्कारधानी का आस्था का प्रमुख केन्द्र होने के नाते यहाँ पर पूजन दर्शन करने के लिए बहुतायत संख्या में भक्त जन पहुचते हैं और अपनी सार्मथ्य और श्रद्धा के अनुसार पूजन एवं दर्शन कर अपनी मनोकामना की पूर्ति करते हैं। भगवान भोलेनाथ कृपापूर्वक सभी भक्तों पर अपना आशीर्वाद बरसाते हैं। गुप्तेश्वर धाम में श्रावण महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाने की बरसों पुरानी परंपरा है। गुप्तेश्वर मंदिर में सावन के मेले की चर्चा बड़े बुर्जुग आज भी करते हैं। अतः इसीलिए प्राचीन काल से ही यह अपनी महिमा और गरिमा के लिए सुप्रसिद्ध रहे हैं।
भगवान श्री राम ने किया था अपने हाथों से स्वयंभू श्री गुप्तेश्वर महादेव का निर्माण
इस प्राचीनतम विग्रह का निर्माण एवं पूजन अपनी वनवास यात्रा में भगवान श्री राम जी ने स्वयं किया था. ऐतिहासिक दृष्टि से मूल शिव पुराण के प्रथम अध्याय के कोटि रुद्र संहिता में वर्णन आता है कि रामेश्वर महादेव ज्योर्तिलिंग के उपलिंग के रूप में नर्मदा तट पर विद्यमान हैं-
“नर्मदायां प्रसिद्धं तत्सर्व पापहरंसमृतम्.
रामेश्वराच्च राज्जातं गुप्तेश्वर मिति रिमृतम्” (शिव महापुराण)
संस्कारधानी के राजा है गुप्तेश्वर महादेव भगवान गुप्तेश्वर की महिमा एवं अपार कृपा से आकर्षित होकर दर्शन पूजन करने के लिये अपनी अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु दूर दूर से भक्तों का आना जाना होता है। देश के अनेक शहरों में भगवान गुप्तेश्वर महादेव जी को मानने वाले भक्त मनोकामना पूर्ण होने पर श्रावण महोत्सव एवं महाशिवरात्रि एवं अन्य दिनों में भी उपस्थित होकर भगवान के पावन दरबार में हवन पूजन भंडारा यज्ञ आदि करवाते रहते हैं। गुप्तेश्वर महादेव मंदिर का श्रावण मास एवं महाशिवरात्रि का मेला प्रसिद्ध है। भगवान श्री गुप्तेश्वर महादेव जी की महती कृपा, उनकी प्रसिद्धि एवं उनके प्रभाव से ही इस क्षेत्र का नाम गुप्तेश्वर पड़ा। जो आज शासन के रिकार्ड में भी दर्ज है।



