मासूमों की जान की कोई कीमत नहीं? कफ़ सिरप त्रासदी पर कटनी कांग्रेस का कैंडल मार्च, सरकार को घेरा

ढीमरखेड़ा जबलपुर दर्पण । छिंदवाड़ा ज़िले के परासिया में ज़हरीली कफ़ सिरप पीने से 20 मासूम बच्चों की मौत के हृदय विदारक मामले में प्रदेश की भाजपा सरकार की कथित घोर लापरवाही के ख़िलाफ़ ज़िला शहर कांग्रेस कमेटी ने मुखर विरोध प्रदर्शन किया। ज़िला शहर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट अमित शुक्ला के नेतृत्व में स्थानीय साधुराम स्कूल से कैंडल मार्च निकालकर शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए सुभाष चौक पर मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफ़े की मांग की गई।
शहर अध्यक्ष अमित शुक्ला ने इस घटना को “हादसा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का नतीजा” बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 मासूमों की जान जाने के बाद भी सरकार अब तक सोई हुई है और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है, विशेषकर दवा कंपनी के मालिक को गिरफ्तार न करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को खो चुके हैं, लेकिन सरकार सफाई देने में व्यस्त है और स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक किसी ने भी नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली। उन्होंने मृत बच्चों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की।
सरकार की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
प्रदेश महिला कांग्रेस महासचिव रजनी वर्मा ने जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे का ज़िक्र किया, जिसमें इंदौर की एक दवा फैक्ट्री में कथित तौर पर फंगस वाले पानी से कफ़ सिरप तैयार करने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि भले ही बच्चों की मौत सीधे इसी फैक्ट्री की दवा से न हुई हो, लेकिन यह खुलासा सरकार की निगरानी व्यवस्था की घोर लापरवाही को दर्शाता है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पदाधिकारियों ने भी सरकार को घेरा। पूर्व अध्यक्ष करण सिंह चौहान ने कटनी ज़िले के सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का मुद्दा उठाया, जबकि वरिष्ठ कांग्रेस नेता राकेश जैन ने भाजपा सरकार की करनी और कथनी में अंतर बताया।
प्रदर्शन में शिक्षा एवं शिक्षा प्रकोष्ठ अध्यक्ष राम नरेश त्रिपाठी, इंटक अध्यक्ष बीएम तिवारी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजा जगवानी, वरिष्ठ पार्षद मौसुफ अहमद बिट्टू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस जन, मोर्चा प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में मांग की कि इस जघन्य लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और सरकार जवाबदेही तय करे।



