आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी को ६५ वर्ष की आयु तक कार्य करने दें : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट

जबलपुर दर्पण। मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश श्री रवि मालीमठ एवं न्यायमूर्ति श्री विशाल मिश्रा की खंड पीठ ने याचिकाकर्ता शाशकीय आयुर्वेद औषधालय मवई जिला सीधी में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ डॉ. चूड़ामणि साकेत के पक्ष पर राहतकारी आदेश प्रदान करते हुए अनावेदकगणो को नोटिस जारी किया । दरअसल ६२ वर्ष की अधिवार्षिकी आयु पूर्ण करने के पश्चात् दिननक २९.०२.२०२४ को डॉ. चूड़ामणि साकेत सेवानिवृत किया जाना था ।
इस याचिका में चुनौती एमपी शासकीय सेवक (अधिवर्षिकी आयु) संशोधन अधिनियम, 2011 की धारा 2 (iii) के उप-नियम (1-सी) (ए) को है, जो आयुष डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्दिष्ट करती है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आयुष डॉक्टरों से संबंधित ऐसी ही स्थिति में माना है कि वे 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के हकदार हैं जो आयुष हैं एवं सीएचएस के अंतर्गत हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश 2021 की सिविल अपील संख्या 4578 से उत्पन्न हुआ है, जिसमें पैरा 22 के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी राहत दी है। इसके अलावा, नर्सों से संबंधित समान परिस्थितियों में, इस न्यायालय की खंडपीठ ने अपने आदेश दिनांक 07.10.2021 (श्रीमती शशिबाला चौहान बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य) में माना है कि नर्सें भी 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने की हकदार हैं।
इसलिए, हमारा प्रथम दृष्टया विचार है कि याचिकाकर्ता और आयुष डॉक्टर भी 65 वर्ष की आयु तक काम करने के हकदार हैं। इसलिए उस सीमा तक, अंतरिम आदेश दिया जाता है जिससे याचिकाकर्ता, जो एक आयुष डॉक्टर है, को 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक काम करने में सक्षम बनाया जा सके। याचिकाकर्ता की ओर श्री विजय राघव सिंह, श्रीमती पूनम सिंह, श्री अजय नंदा एवं श्री मनोज चतुर्वेदी अधिवक्तागण ने पैरवी की ।



