व्यक्तित्व विकास और अभिप्रेरणा का असीम भंडार है वैदिक साहित्य

दत्त मंदिर मे दासबोध चिंतन शिविर संपन्न
जबलपुर दर्पण। समर्थ गुरू रामदास राष्ट्र निर्माण और चितंन के लिए सर्वस्व समर्पित करने की गुरू शिष्य परापंरा के संवाहक थे। चाणक्य – चंद्र गुप्त, रामदास – छत्रपति शिवाजी , रामकृष्ण परमहंस – स्वामी विवेकानंद जैसे अनेक विग्रहों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए देशाटन कर राष्ट्र निर्माण और समाज को संगठित करने का कार्य किया। आज अभिप्रेरण और संगठन क्षमता विकास के लिए लोग फीस देकर प्रशिक्षण ले रहे हैं जबकि भारतीय सनातन वैदिक साहित्य व्यक्तित्व विकास व अभिप्रेरणा का असीम भंडार है। उक्त उदगार सुरेश तोफखानेवाले ने श्री सत्संग सभा यादव कालोनी, आषाढी कार्तिकी वारी महामंडल जबलपुर के संयोजकत्व श्री दत्त मंदिर आयोजित दास बोध चितंन शिविर मे व्यक्त किए । स्वामी रामदास ने शारीरिक सौष्ठव और मानसिक विकास के लिए अनवरत प्रयास कर भारत के कोने कोने में हनुमान मंदिर और अखाड़ों की स्थापना कराई। विजय दहीबड़े ने कहा कि जिस विषय की चर्चा मे विवाद नही वह संवाद है और जो चितंन मनन तथा पठन पाठन कर प्रतिपादित विषय रखे वह वक्ता होता है, लेकिन जो विषय को आत्मसात करे वह श्रोता है। चितंन शिविर मे दत्त मंदिर अध्यक्ष विजय भावे, विश्वास पाटंणकर, अभय गोरे, राजेश तोफखानेवाले, संतोष गोडबोले, प्रवीण विप्रदास, पदमाकर तलवारे, आशा सोलंकी, श्रीरंग गोखले, अमिय, गोरे, विध्येश भापकर, सीमा गोडबोले, नीलिमा देशपांडे, मंगला फाटक, सुनिति फाटक, शुभदा महाजन, प्रणाली देशमुख, विद्या दाभोलकर, आरती देशपांडे, शेखर कालवे, अमिय गोरे, मनसुख व गोविंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।



